उत्तर प्रदेश में हर छठा व्यक्ति है मानसिक रोगी

यह चौकानें वाली हकीकत इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी (आईपीएस) के वार्षिक अधिवेशन में मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. शशिराय ने बताया कि ज्यादातर लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता है जिस कारण वह खुद को सामान्य ही महसूस करते हैं। डा. राय का कहना है कि लोगों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए, असावधानी बरतने से स्थिति बिगड़ सकती है।
उनका कहना है कि कई मानसिक रोगियों की परिजन जाने-अनजाने झांड़-फूंक कराने लगते हैं जिससे रोग ठीक तो नहीं हो पाता हालांकि बीमारी बढ़ अवश्य जाती है। डा. राय ने बताया कि लोगों को फोबिया, सीजोफ्रेनिया, एल्कोहल पर निर्भरता, मूड डिसआर्डर, काग्निटिव डिसआर्डर, डिप्रेशन, तनाव, व्यक्तित्व विकार की समस्याएं ज्याद हैं। सोसायटी के अध्यक्ष डा.एस.बी. जोशी का कहना है कि आबादी में 10से 20 प्रतिशत लोग मानिसक रोग से पीड़ित होते हैं।
उत्तर प्रदेश में भी यही स्थिति है। क्रानिक बीमारों की संख्या भी सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में है। विशेषज्ञ डा. के.सी. गुरनानी का कहना है कि मानसिक रोग अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह कम पड़ रही है यह स्थिति बताती है कि राज्य में मानसिक रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके लिए सरकार को विशेष उपाय करने होंगे।
ऐसी बीमारियों पर अंकुश लगाने के ठोस उपाय भी ढूंढने होगें यदि ऐसा न किया गया आने वाले समय में स्थिति भयावह हो जाएगी चिकित्सकों के अनुसार मानसिक रोगियों की सबसे अधिक संख्या आगरा, लखनऊ, इलाहाबाद, मेरठ, गाजियाबाद व बनारस जिलों में मिल रही हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों की मानें तो मरीजों की संख्या सामाजिक और आर्थिक असमानता की वजह से भी बढ़ रही है। पारिवारिक परेशानी और तनाव भी इसका एक बड़ा कारण है।












Click it and Unblock the Notifications