'खान' होने से कोई आंतकवादी नहीं हो जाता: सुप्रीम कोर्ट
आज महामहिम अदालत ने यह बात उस समय कही जिस समय गुजरात में आतंकवाद के आरोप में दोषी करार दिए 11 लोगों को बरी किये जाने का उसने आदेश दिया था। आपको बता दें यह सभी पिछले 11 साल से जेल में थे।
गौरतलब है कि बरी किये गये सभी 11 मुस्लिमों को साल 2002 में टाडा (आतंकवाद और विध्वंसकारी गतिविधि रोकथाम कानून) की विशेष अदालत ने, 1994 में गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्ननाथ पुरी यात्रा के दौरान कथित तौर पर सांप्रदायिक हिंसा की साजिश रचने का दोषी करार दिया था, जिसके कारण यह सभी जेल में थे।
उच्चनम न्यायालय ने जिला पुलिस को सख्त हिदायत दी कि वो किसी को भी धर्म के आधार पर गिरफ्तार नहीं कर सकती है। खुद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां सारे धर्म के लोगों का उच्च स्थान है इसलिए पुलिस को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे आम आदमी के दिल में दहशत जन्म ले और वो खौफजदा हो। देश में किसी भी मुस्लिम को यह नहीं लगना चाहिए कि उसे 'माय नेम इज खान बट आई एम नॉट टेरेरिस्ट' के कारण सताया जा रहा है।













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