नितिन गडकरी जी आपका जहाज कितना तैयार है?

अगर भाजपा तैयार नहीं है, तो इस समय भाजपा कार्यकर्ता क्या कर रहे हैं। तो चलिये हम आपको बताते हैं। हमने इस बात का आंकलन करने के लिये भाजपा की उत्तर प्रदेश में विभिन्न इकाईयों के नेताओं से बात की। लेकिन चूंकि बात राष्ट्रीय अध्यक्ष के विरुद्ध थी, इसलिये कोई भी ऑन द रिकॉर्ड नहीं आया। हमने उत्तर प्रदेश इसलिये चुना है, क्योंकि हर बार की तरह लोकसभा चुनाव 2014 में भी यूपी अहम रोल अदा करेगा।
हम शुरुआत करेंगे प्रदेश इकाई के उस नेता से, जो पिछले 12 साल से पार्टी की सेवा कर रहे हैं और चौक में लालजी टंडन के घर के पास रहते हैं। नेता जी ने बताया कि इस समय यूपी में स्थिति बड़ी बुरी है। पार्टी ने डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है, लेकिन बाकी पदों पर तैनात लोग वही हैं, जो सूर्य प्रताप शाही के समय में थे। यानी अध्यक्ष छोड़ कर बाकी के सभी पदाधिकारी वही हैं, जिन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव में रणनीति बनाई थी और उन्हें हार मिली थी।
हमने जब नेताजी से यह पूछा कि क्या भाजपा वर्तमान पदाधिकारियों के भरोसे ही लोकसभा के मैदान में उतरेगी। तो जवाब मिला नहीं। पार्टी अगले एक सप्ताह या महीने के अंदर नई कार्यकारिणी का गठन करेगी। लक्ष्मीकांत बाजपेयी अपनी टीम लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें उन्हीं के खास लोग शामिल होंगे। यही नहीं लालजी टंडन के काफी खास रहे इन नेता जी ने यह भी बताया कि यूपी में अंदरूनी गतिरोध आज भी जारी है।
भाजयुमो के एक पूर्व शहर अध्यक्ष ने बताया कि भाजपा व युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को आलाकमान से आदेश मिले हैं, कि जनता के बीच जायें और उन्हें कांग्रेस की कमियां गिनायें। पूर्व अध्यक्ष ने कहा, "वैसे भी कमियां गिनायें चाहे नहीं, जनता इस समय कांग्रेस से त्रस्त है इसलिये वोट हमें ही मिलेगा।"
इसके बाद हमने नितिन गडकरी के फेवरेट संगठन भाजपा अन्त्योदय प्रकोष्ठ। शायद आप इस प्रकोष्ठ के बारे में नहीं जानते होंगे। यह वो प्रकोष्ठ है, जो देश के अंतिम व्यक्ति तक को भाजपा से जोड़ने का काम करता है। यूपी में इस प्रकोष्ठ के संयोजक से बात करते वक्त हमें साफ हो गया कि ये भी गलत दिशा में जा रहे हैं। संयोजक महोदय ने जब यह कहा कि हमारा प्रकोष्ठ शहरों में ज्यादा सक्रिय है। गांव-कस्बे में कार्यकर्ताओं की कमी के कारण हम वृहद स्तर पर काम नहीं कर पा रहे हैं। 2014 के चुनाव तक लोगों तक भाजपा की नीतियों को पहुंचाना हमारा काम है और वो हम कर रहे हैं, बाकी जनता क्या फैसला करेगी यह तो 2014 में ही पता चलेगा।
कुल मिलाकर देखा जाये तो नितिन गडकरी केंद्र के जहाज के डूबने का इंतजार तो कर रहे हैं, लेकिन यह नहीं देख रहे हैं कि उनका खुद का जहाज कितना तैयार है। क्योंकि अभी तक की तस्वीर यही कह रही है, कि अगर चुनाव हुए तो लोग भाजपा को वोट सिर्फ यूपीए से खुन्नस खाने की वजह से देंगे, न कि उसकी खुद की काबीलियत के चलते।












Click it and Unblock the Notifications