माही मामले में अफसरों को क्लीन चिट, सरपंच सहित 6 दोषी

Clean chit to officers responsible for Mahi's death
गुडग़ांव। माही दुर्घटना मामले की मजिस्ट्रियल जांच करने वाले जांच अधिकारी एवं एडीसी केएम पांडूरंग ने डीसी पीसी मीणा को अपनी 204 पेज की जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। रिपोर्ट में गांव की सरपंच, ग्राम सचिव, पंच सहित छह लोगों को दोषी ठहराया गया है। हालांकि जांच में एसडीएम, डीडीपीओ, बीडीपीओ, हाइड्रोलॉजिस्ट व पुलिस के आला अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई है।

20 जून को मानेसर के गांव कासन की ढाणी में हुई दुर्घटना की जांच करने वाले एडीसी ने अपनी रिपोर्ट में भवन मालिक रोहताश तायल, उसके लिए किराया वसूलने वाले केयर टेकर सुरेन्द्र सिंह, कासन गांव की सरपंच बिमला देवी, ग्राम सचिव सुरजीत, वार्ड पंच व बोरिंग मशीन के मालिक को दोषी ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भवन मालिक रोहताश तायल ने अपने घर में बिना डीसी की इजाजत से तीन अवैध बोरवेल खोदे थे, जिसमें एक चालू था और दो बिना मिट्टी भरे और ढके खुले छोड़ दिए गए। इनमें से खुले छोड़े गए एक बोरवेल में गिरने से चार साल की माही की मौत हो गई थी। रिपोर्ट में रोहताश को यह कहते हुए दोषी कराया दिया गया है कि यदि रोहताश तायल उन बोरवेलों को समय पर भरवा देता तो यह दुर्घटना नहीं होती।

जबकि रोहताश तायल के मकानों का किराया वसूलने व मकान की देखरेख का काम करने वाले सुरेन्द्र सिंह को यह कहते हुए दोषी माना गया है कि यदि भवन मालिक ने खुले पड़े बोरवेल भरवाने में कोताही की तो केयर टेकर होने के नाते सुरेन्द्र सिंह को वे बोरवेल मिट्टी से भरवाने चाहिए थे। सुरेन्द्र को दोषी ठहराने का एक कारण यह भी बताया गया है कि उसकी दुकान भी उसी परिसर में हैं, जहां पर दुर्घटना की शिकार हुई माही का परिवार रहता था।

रिपोर्ट में इन अवैध बोरवेल की खुदाई करने वाली मशीन के मालिक को इसलिए दोषी माना गया है, क्योंकि उसने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के एक अवैध बोरवेल की खुदाई की। जांच अधिकारी द्वारा अपनी रिपोर्ट में ग्राम पंचायत कासन की सरपंच बिमला देवी, ग्राम सचिव सुरजीत तथा संबंधित पंच को यह कहते हुए दोषी ठहराया है कि यह विश्वास करने के लायक नहीं है कि तीन बोरवेलों की भारी मशीन से खुदाई की गई और पंचायत के इन पदाधिकारियों को उसका आभास तक नहीं हुआ। रिपोर्ट में इसलिए भी इन लोगों को दोषी ठहराया है, क्योंकि सभी सरपंचों ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों को यह शपथ-पत्र दे रखा है कि उनके क्षेत्र में यदि कोई भी अवैध बोरवेल खोदा जाता है तो उसकी सूचना वे जिला प्रशासन को देंगे, लेकिन गांव कासन के सरपंच व ग्राम सचिव ने ऐसा नहीं किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरपंच अपने क्षेत्र में अवैध बोरवेलों की खुदाई रोकने में पूर्ण रूप से असफल रही हैं।

जांच अधिकारी का मानना है कि अवैध बोरवेलों की खुदाई पर निगरानी रखना एक कठिन कार्य है और इस पर जागरूक लोगों की मदद से ही रोक प्रभावी ढ़ंग से लगाई जा सकती है। रिपोर्ट में माही प्रकरण का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस भवन के आसपास तीन बोरवेल खोदे गए थे और वहां पर रह रहे सैकड़ों परिवारों में से किसी ने भी प्रशासन को इस बारे में सूचित करने की जहमत नहीं उठाई। सबसे बड़ी बात यह है कि इस जांच में संबंधित इलाके के आला अधिकारियों को भी शामिल किया गया, लेकिन उनकी जिम्मेदारी रिपोर्ट में कहीं भी तय नहीं की गई।

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