महिला शिक्षण संस्थाओं में मिलेंगे सैनिटरी नैपकिन

उन्होंने बताया कि बहुत ही कम राशि में यह नैपकिन लड़कियों एवं महिलाओं को मशीन के माध्यम से मिलेगा। नैपकिन प्राप्त करने के लिए मशीन में सिक्का डालना होगा। उन्होंने बताया कि पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना केंद्र सरकार द्वारा सिरसा और महेंद्रगढ़ जिलों में शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य पिछड़े जिलों में क्षेत्रीय संतुलन कायम करना है।
उन्होंने बताया कि नैपकिन के लिए ये मशीनें शिक्षण संस्थानों में नि:शुल्क स्थापित की जाएंगी। लड़कियां एवं महिलाएं मशीनों में सिक्का डालकर नैपकिन ले पाएंगी। जिला प्रशासन की सोच है कि नैपकिन भी लड़कियों और महिलाओं को नि:शुल्क मुहैया करवाए जाए लेकिन ऐसा करने से नैपकिन का दुपयोग होने की संभावना है इसलिए एक या दो रुपए कीमत रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा मशीन स्थापित करने वाली कंपनियों से टेंडर भी आमंत्रित किए गए हैं। आगामी 25 सितंबर तक कंपनियों से टेंडर मांगे गए हैं। इसके तुरंत बाद शिक्षण संस्थानों में मशीनें स्थापित कर दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि उपयोग में लाए गए नैपकिन को नष्ट करने के लिए भी अलग से मशीन स्थापित की जाएगी जिससे सही तरीके से गंदे नैपकिन को जलाया जा सकेगा।
डा. गणेसन ने बताया कि शिक्षण संस्थाओं में मशीनों की स्थापना होने से लड़कियों एवं महिलाओं को हाईजनिक सुविधाएं मिलेंगी जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा और लड़कियों को इंफैक्शन व अन्य बीमारियों से छुटकारा मिल पाएगा। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार लड़कियों एवं महिलाओं के लिए बेहतर किस्म के डिपोजल एवं नैपकिन का प्रयोग बहुत जरूरी है। जागरूकता के अभाव व जाने-अनजाने में महिलाएं कपड़ों का प्रयोग करती है जो स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। गंदे कपड़ों से इंफैक्शन हो जाता है और इस प्रकार से इंफैक्शन पूरे शरीर में फैल जाए तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।












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