एक नाम पर दस-दस एलपीजी कनेक्शन

इस कालेज का नाम है जेआरआरपीएफ ट्रेनिंग कालेज। सूत्रों के अनुसार कनेक्शनों का सीरियल नम्बर पर भी क्रम से है यानि आरजेपी 4132 से 4140 तक। इसी प्रकार एसजीपीजीआई के निदेशक के नाम पर 14 गैस सिलेण्डरों के कनेक्शन हैं। अब इस प्रकार गरीबों के हक पर यदि वीआईपी डाका डालते रहे तो फिर उनके पास क्या विकल्प रह जाता है।
थानेदार भी दबंगई में शामिल
लखनऊ फैजाबाद रोड पर स्थित गाजीपुर थाने में भी घरेलू गैस सिलेण्डर का दुरपयोग चल रहा है। थाने में चार माह के दौरान 565 गैस सिलेण्डरों का प्रयोग कर लिया गया। इन सिलेण्डरों पर सरकार ने 1 लाख, 88 हजार, 137 रूपए की सब्सिडी दी। देखने वाली बात यह है कि थाने में भोजन तो पकता नहीं तो आखिर यह सिलेण्डर जाते कहां है। सिपाही व दीवान आदि वीआईपी अधिकारियों की श्रेणी में भी नहीं आते फिर यह अनदेखी क्यों। सूत्रों की माने तो पुलिस वाले सिलेण्डरों की कालाबाजारी कर रहे हैं तथा कई पुलिस वाले थाने के नाम पर लिए जाने वाले सिलेण्डर अपने घर ले जाते हैं।
वीआईपी के अलावा और भी
ऑल इण्डिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेेशन के अधिकारी उपरोक्त मामले में भले ही यह तर्क देते हों कि वीआईपी के लिए कोई लिमिट नहीं होती लेकिन कर्ई ऐसे भी हैं जो वीआईपी न होकर भी भारी संख्या में सिलेण्डर ले रहे हैं। गुरूद्वारा में गुलजार सिंह के नाम से चल रहे एक कनेक्शन पर 4 माह के दौरान 279 सिलेण्डर लिए गए जो नियमों की अनदेखी बयां करते हैं। इसी प्रकार सरस्वती डेंटल कालेज में बीते चार माह में 301 सिलेण्डरों की खपत हो गयी। यह सारे वह सिलेण्डर थे जिन पर सरकार ने सब्सिडी दी आखिर इन लोगों को सब्सिडी वाले सिलेण्डर किस नियम के तहत दिए गए।












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