थम नहीं रहा एफडीआई का विरोध, जगह-जगह प्रदर्शन

लखनऊ। रिटेल सेक्‍टर में एफडीआई को केंद्र में कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद से देश भर में विरोध की आग भड़क उठी है। आग की लपटें सभी राज्‍यों में दिखाई दे रही है। एक ओर उत्तर प्रदेश व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्र ने केन्द्र द्वारा खुदरा क्षेत्र में एफडीआई लागू करने को व्यापारियों के साथ बड़ा धोखा बताते हुए 20 सितम्बर को प्रदेश बंद की घोषणा कर दी है।

डीजल मूल्यवृद्धि, एलपीजी पर सब्सिडी घटाने व एफडीआई के विरोध में पार्टी के आह्वान पर माले कार्यकर्ता सडकों पर उतरे और बलिया, देवरिया, गोरखपुर, गाजीपुर, फैजाबाद, इलाहाबाद, सोनभद्र समेत विभिन्न जिलों में मनमोहन सरकार का पुतला कल शाम फूंका। कार्यकर्ताओं के साथ कुछ जगहों पर जनता भी दिखायी दी जिसने सरकार के इस फैसले पर विरोध जताया।

विधानसभा के सामने प्रदर्शन

विधानसभा के सामने प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश उदयोग व्यापार प्रतिनिधि मंडल से जुड़े सभी व्यापारी आगामी 20 सितंबर को पूरे प्रदेश में अपने व्यापार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखेंगे और धरना प्रदर्शन कर केन्द्र सरकार के इस कानून के खिलाफ आवाज उठायेंगे। व्यापारियों का कहना है कि कांग्रेस सरकार इस प्रकार के फैसले ले रही है जिससे देश के व्यापारियों की कमर टूट जाएगी और वह बाजार में व्यापार नहीं कर सकेंगे।

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने किया विरोध

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने किया विरोध

वहीं दूसरी ओर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफडीआई की इजाजत देने के केन्द्र के फैसले के विरोध में रविवार को विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किया। केन्द्र के निर्र्ण को जनविरोधी बताते हुए पार्टी ने इसे वापस लेने की मांग की।

सड़कों पर उतरे युवा

सड़कों पर उतरे युवा

केंद्र सरकार के विरोध में उत्‍तर प्रदेश की सड़कों पर सैंकड़ों युवा उतर आये। इनमें कई छात्रनेता भी शामिल थे। युवाओं ने सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

विधानसभा के सामने प्रदर्शन

विधानसभा के सामने प्रदर्शन

इससे पूर्व कल शनिवार को राजधानी लखनऊ में व्यापारियों ने केन्द्र सरकार व सोनिया गांधी का पुतला जलाकर विरोध जताया तथा एफडीआई के निर्र्णय को वापस लिए जाने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार अपने निर्र्णय को वापस नहीं लेती तो वह अपना आन्दोलन जारी रखेंगे। उधर भाजपा व बसपा समेत कई राजनीतिक दल एफडीआई के खिलाफ हैं।

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कड़ी

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कड़ी

विधान भवन के सामने प्रदर्शन के दौरान लखनऊ पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी, ताकि कोई भी उपद्रव न हो सके। इस दौरान राज भवन तक जाने वाले सभी रास्‍ते बंद कर दिये गये। इस प्रदर्शन में कांग्रेस पार्टी को छोड़ बाकी सभी के नेता शामिल थे।

क्‍या ये प्रदर्शन बदल पायेंगे नीतियां?

क्‍या ये प्रदर्शन बदल पायेंगे नीतियां?

हमारा सवाल यह है कि जिस प्रकार जनता का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है, क्‍या उससे केंद्र की नीतियों में कोई परिवर्तन होगा। क्‍या केंद्र में बैठे लोग डीजल के बढ़े दाम वापस लेंगे या फिर एफडीआई वापस लेंगे?

भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि मनमोहन सरकार एक के बाद एक जनविरोधी फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के हितों को बात सोचना छोड़कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार आम जनता मंहगाई के बोझ के नीचे और दब जाएगी।

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