भारत के बड़े हिस्से को हड़पने के चक्कर में पाकिस्तान

अब तक पाकिस्तानी नियंत्रण के बावजूद वहां अदालतें और पाकिस्तानी संविधान इसे पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते हैं। वहां के नागरिको को पाकिस्तान के अन्य नागरिकों की भांति अधिकार भी अब तक प्राप्त नहीं हैं। 1994 में पकिस्तान की अपनी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में साफ़ कर दिया था कि यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा है. यह बात वैधानिक रूप से सही भी है कि आज का गिलगित-बाल्टिस्तान अंग्रेजी राज के दिनों में डोगरा महाराजा हरि सिंह की रियासत का एक भाग था।
पीओके का 80 फीसदी हिस्सा है यह राज्य
क्षेत्रफल के लिहाज से पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर रियासत का यह भाग आज के पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर का लगभग अस्सी फीसदी क्षेत्र है। चूंकि 1947 में इस समूची रियासत का विलय महाराजा हरि सिंह ने भारत में कर दिया था, इसलिए वैधानिक रूप से यह भारत का ही अंग है। भारत के संविधान और संसद की निगाह में भी गिलगित -बाल्टिस्तान सहित समूचा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, यह बात सब जानते हैं।
1994 में सर्वसम्मत प्रस्ताव से हमारी संसद ने पाकिस्तान से इस इलाके को भारत को सौंपने के लिए कहा था। हाल ही में रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने दोहराया था कि जम्मू कश्मीर में अगर कोई काम अधूरा है तो वह है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे से राज्य के उस भू-भाग को आजाद कराना जिसमें गिलगित बाल्टिस्तान भी शामिल है।
मौजूदा पाकिस्तानी कसरत का अभिप्राय यह है कि पाकिस्तान अवैध कब्जे वाली हमारी भूमि को अपनी मिल्कियत घोषित करने की नापाक कोशिश कर रहा है। इस गैर-कानूनी प्रयास के खिलाफ दिल्ली दरबार से अब तक कोई बुलंद आवाज न उठना इस बात का संकेत है कि हमारा सत्ता प्रतिष्ठान अपनी सीमाओं व भूमि को लेकर बहुत सजग और संवेदनशील नहीं है। दिल्ली को चाहिए कि इस कवायद के खिलाफ अपना विरोध पुरजोर ढंग से दर्ज कराए। वरना संसद के संकल्प और रक्षा मंत्री के हालिया बयान का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा और दुनिया में हमारी खिल्ली उड़ाई जाएगी ।
पीओके के लोगों को मिलेंगे पाक के सभी अधिकार
पाकिस्तानी मीडिया की रिर्पोटों के अनुसार गिलगित-बाल्टिस्तान की असेंबली में प्रस्तुत व पारित प्रस्ताव में इलाके को पाकिस्तान के नए सूबे का दर्जा देने की मांग की गई है। यह दर्जा मांगने वालों का कहना है कि ऐसा होने के बाद इस इलाके के लोगों को वह सब अधिकार मिल जाएंगे जो किसी भी दूसरे पाकिस्तानी राज्य के नागरिकों को हासिल हैं।
अब तक यह के लोगों को पाकिस्तान के हुक्मरानों ने आधारभूत मानवीय अधिकारों से भी वंचित रखा हुआ है और सूबा बनने के बाद यहां के लोग नेशनल असेंबली में अपने नुमांइदे भेज सकेंगे। मगर भारतीय दृष्टिकोण और कानूनी नजरिए से देखें तो यह जम्मू कश्मीर के एक भाग को जबरन पाकिस्तान का अंग घोषित करने की साजिश मात्र है। इसका विरोध भारत सरकार को करना चाहिए।












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