नरेंद्र मोदी के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी में मुलायम

आगामी दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी गुजरात की 10 प्रमुख सीटों पर चुनाव लड़ेगी जिस कारण अब तक धर्म और जाती के आधार पर राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर संकट के बादल गहराने लगे हैं। समाजवादी पार्टी भरसक कोशिश कर रही है की कैसे वो गुजरात के उस बड़े और खास वर्ग को अपनी तरफ आकर्षित करे जिसने मोदी को सत्ता में काबिज करने में एक बड़ा ही महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
सपा खेमे से जुड़े और पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बेहद नजदीक जुड़े सूत्रों की माने तो अभी कुछ दिनों पूर्व ही गुजरात से आये समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं और कुछ ब्यूरोक्रेटों ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव और पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान से मुलाकात कर आने वाले चुनाव की रणनीति तैयार कर ली है।
इस मुलाक़ात के दौरान सपा मुखिया और मुख्यमंत्री ने आये हुए कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है की वो गुजरात जाकर आम जनता को ज्यादा से ज्यादा तादाद में समाजवादी पार्टी से जोड़े। सूत्रों ने ये भी बताया की मुलायम इस बात को भली भांति जानते हैं की आज भी गुजरात का एक बहुत बड़ा वर्ग गुजरात में हुए दंगों से खासा खफा है जिसका मानना है की अगर वहां दंगे न हुए होते तो राज्य आज कहीं ऊपर होता सूत्रों ने ये भी बताया की वहां हुए इन दंगों के एक दशक बाद अब मुलायम उसे भुनाने की फिराक में हैं। वैसे भी सर्वज्ञात है की मुलायम मुसलामानों के बीच खासे लोकप्रिय भी है और यही वजह है जिस कारण उन्हें मुल्लाह मुलायम कहा जाता है।
बीते कई दिनों से कयास लगाये जा रहे थे की मुलायम केंद्र की राजनीति में एक बहुत बड़ा फेर बदल कर सकते हैं और बताया जा रहा है की गुजरात के कार्यकर्ताओं के लखनऊ आने से मुलायम की इस मुहीम की पहल भी हो चुकी है। गौरतलब है की सपा मुखिया और यूपीए के अहम सहयोगी लगातार कई वर्षों से थर्ड फ्रंट के जरिये केंद्र की सत्ता पर काबिज होने की कोशिश कर रहे हैं साथ ही बीते दिनों सपा मुखिया ने अपने कोलकाता दौरे में इस बात को पुख्ता करते हुए कहा था कि अब वो समय आ गया है जब थर्ड फ्रंट बनना चाहिए।
आखिर क्यों बनना चाहिए थर्ड फ्रंट
इस सवाल पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने तर्क देते हुए कहा है कि कांग्रेस समर्थित यूपीए सरकार भ्रष्टाचार के अलग अलग आरोप झेल रही है जिस कारण आने वाले लोक सभा चुनाव में उसके लिए दोबारा सरकार बनाना एक टेड़ी खीर है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि सारा देश इस समय आर्थिक उथल पुथल का सामना कर रहा है।
क्या भाजपा सरकार बना पायगी
इस सवाल पर मुलायम ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक मजबूत नेतृत्व होने के कारण भाजपा आपसी मतभेद का सामना कर रही है जिस वजह से भविष्य में उसका एक बड़ी पार्टी के रूप में दोबारा सामने आना मुश्किल है।
समाजवादी पार्टी को एक मात्र विकल्प बताते हुए मुलायम ने कहा कि ऐसी स्थिति में सपा ही वो पार्टी है जो एक बड़ी जिम्मेद्दारी ले सकती है। उन्होंने तमाम छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों से अनुरोध किया है कि यदि उन्हें अपना अस्तित्त्व बरकरार रखना है तो वो सपा को अपना समर्थन दें।
खैर इन बातों से एक बात तो साफ़ है कि हो न हो लेकिन मुलायम सिंह यादव जरूर अपने आप को अभी से ही पीएम की कुर्सी पर देख रहे हैं। जिसके लिए वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते नजर आ रहे हैं। कोलकाता जाकर 'दीदी' से मिलना, गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं के मजबूत संगठन की मांग, मुलायम की कांग्रेस और भाजपा की कार्यप्रणाली पर प्रतिक्रिया इस बात की और साफ़ इशारा करती है की मुलायम एक बड़ी पारी खेलने की पूरी जद्दोजहद कर रहे हैं ।












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