ढाई महीने बाद कब्र से निकाल कर हुआ पोस्टमार्टम

Death
अमरोहा। ढाई माह पूर्व दहेज के लिए एक विवाहिता की हत्या की गयी और उसके शव को दफन कर दिया गया। मामला उछला लेकिन पुलिस ने ससुराल पक्ष से मिलकर मामले को दबा दिया। मायके वालों के प्रयास के चलते आला अधिकारियों के आदेश पर ढाई माह बाद मृतक के शव को कब्र से बाहर निकालकर गुरूवार को उसका पोस्ट मार्टम कराया गया।

उत्तर प्रदेश में अमरोहा के नोगांवा सादात इलाके में दहेज के लिये ढाई महीने पहले एक विवाहिता की हत्या कर दी गयी थी जिसका पोस्टमार्टम कब्र से निकाल कर कराया गया और दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।

पुलिस महानिरीक्षक देवेन्द्र सिंह चौहान के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक दीपिका गर्ग ने गुरूवार को विवाहिता के ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। बिजनौर के थाना मंडावली क्षेत्र के गांव सिकरौडा निवासी मोहम्मद यासीन ने अपनी बेटी तस्लीमा खातून व छोटी बेटी मुस्लीम की शादी 30 मई 2010 को नौगावां सादात थाना क्षेत्र के मूढा खेडा निवासी सुलेमान के बेटे आस मोहम्मद और लियाकत के साथ की थी।

आरोप है कि शादी के बाद दोनों विवाहिताओं को परेशान किया जाने लगा। बीती 13 जून को तस्लीमा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। पुलिस के अनुसार तस्लीमा खातून की संदिग्ध अवस्था में मौत हुई। ससुराल वालों ने बिना उसके मां-बाप को बताये शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।

मृत्यु के चार दिन बाद जब मां-बाप को इसका पता चला तो उन्होंने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराना चाहा। ससुराल वालों की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस अधीक्षक तक ने उनकी बात नहीं सुनी। थाने पर बैठे पुलिस वालों ने मामले की अनसुनी करते हुए मामला रफा-दफा करा दिया। तस्लीमा के पिता यासीन ने पुलिस महानिरीक्षक के यहां गुहार लगायी।

उन्होंने कड़े शब्दों में निर्र्देश जारी किया मामला जो भी शव का पोस्ट मार्टम हो तथा मायकेवालों की रिपोर्ट दर्ज की जाए। उनके आदेश पर ससुराल के आठ लोगों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र से शव को निकाला गया। आज दोपहर तस्लीमा के शव को कब्र से निकालकर शव विच्छेदन गृह भेजा जा सका।

पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि मृतका के पिता ने अपनी बेटी तस्लीमा की मौत जहरीले इंजेक्शन दिये जाने के कारण होना बतायी थी और शव को बगैर पोस्टमार्टम कराये दफनाना भी विवेचना को आधी अधूरी साबित करता है इसलिए अमरोहा की पुलिस अधीक्षक को शव की जांच व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिये गये थे। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार शव की जांच न होना विवेचना स्तर पर लापरवाही जरुर है लेकिन ढाई माह बाद जांच होना सिर्फ औपचारिकता भर है।

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