महज औपचारिकता पूरी करने के लिये पीएम ने दिया संसद में बयान

Prime Minister Manmohan Singh
नई दिल्‍ली। देश की सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ, जनता का पैसा कहां गया, किसी को परवाह नहीं। यहां तक प्रधानमंत्री को भी नहीं। जी हां संसद में प्रधानमंत्री के बयान को सुन कर आप भी यही कहते, क्‍योंकि लोकसभा में उनका बयान महज औपचारिकता पूरी करने जैसा दिखा।

यूपीए सरकार पर लगी कोयले की कालिख को साफ करना इतना आसान नहीं है, यह शायद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भलीभांति जान गये हैं। शायद यही है कि उन्‍होंने संसद में कोई भी बात ठोस रूप से नहीं कही। पीएम ने जो कुछ भी कहा, वह सब वही बातें थीं, जो एक आम आदमी आरोप लगने के बाद कहता है।

पीएम की बातें, जनता की ओर से वनइंडिया के सवाल-

पीएम- मेरे ऊपर लगे सभी आरोप निराधार हैं।
वनइंडिया- एक छोटे से अधिकारी पर भी कोई आरोप लगते हैं तो वह भी यही शब्‍द कहता है, तो आपने नया क्‍या कहा?

पीएम- सीएजी की रिपोर्ट विवादित है और उसकी फिर से समीक्षा की जायेगी।
वनइंडिया- यह बात तो कांग्रेस पिछले कई दिनों से कह रही है, तो आपने नया क्‍या कहा?

पीएम- कृपया विपक्षी दल संसद में आयें और सदन की कार्यवाही चलने दें।
वनइंडिया- अगर आपकी सरकार कुछ स्‍पष्‍ट करने को तैयार नहीं है, तो विपक्षी दल संसद में क्‍यों आयें?

पीएम- राजस्‍थान, पश्चिम बंगाल और छत्‍तीसगढ़ सरकारें कोयला खनन आवंटन के विरोध में थीं।
वनइंडिया- विरोध के बावजूद अगर आवंटन किया गया, तो इसका मतलब साफ है कि केंद्र ने राज्‍यों पर अपना फैसला थोपा।

पीएम- मंत्रालय में जो कुछ भी हुआ, उसकी जिम्‍मेदारी मेरी।
वनइंडिया- जाहिर है उस दौरान कोयला मंत्री आप थे तो जिम्‍मेदारी आप की ही हुई। अगर जिम्‍मेदारी ले ली है, तो क्‍या 1.86 लाख करोड़ के घाटे की भरपायी का तरीका खोज पायेंगे?

पीएम (हताश होकर)- अगर आप सभी को लगता है कि मैं इन सबके लिये जिम्‍मेदार हूं, तो मैं इस घाटे की जिम्‍मेदारी लेता हूं। सारी जिम्‍मेदारी मेरी, लेकिन आरोप गलत।
वनइंडिया- विपक्ष के शोर-शराबे के बीच आपने यह तो कह दिया कि सारी जिम्‍मेदारी आप की, तो इससे जनता के करोड़ों रुपए की भरपायी हो जायेगी? क्‍या निजी कंपनियों की तिजोरियों में गया पैसा वापस आ जायेगा? और अगर आप जिम्‍मेदार हैं, तो शायद प्रधानमंत्री बने रहने का आपको कोई अधिकार नहीं।

संसद के अंदर खड़े होकर देश को संबोधित करने वाला यह बयान सिर्फ वही लोग सुन सके, जिनके कानों में हेडफोन लगा था। सदन में बैठे लोगों के कानों तक एक भी शब्‍द शायद ही पहुंचा हो, क्‍योंकि भाजपा के हंगामे के बीच पीएम की आवाज दब गई। यहां तक टीवी पर लाइव देख रहे लोग भी पीएम का बयान नहीं सुन सके और सदन की कार्यवाही स्‍थगित कर दी गई।

जरा सोचिये आज जो कुछ भी सदन में हुआ, यह क्‍या है। सच पूछिए तो यह औपचारिकता के सिवा कुछ नहीं।

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