फूलनदेवी के साथियों पर आरोप पत्र तय

फूलन देवी का इतिहास भी काफी दर्दनाक रहा है। फूलन की दर्दनाक कहानी शुरू होती है 80 के दशक से। जहां मध्य यूपी में सक्रिय दस्यु गिरोह में फूट पड़ गया और श्रीराम-लालाराम नामक दो भाइयों ने फूलन और उसके प्रेमी विक्रम मल्लाह को मारने की कोशिश की। हमले में विक्रम मारा गया जबकि फूलन बच गई। फूलन को दोनों भाई उठाकर बेहमई गांव लाए औऱ यहां बंधक बना लिया। उसके बाद इन दोनों भाईयों ने और उनके गिरोह के अन्य सदस्यों ने फूलन के साथ बलात्कार किया पर फूलन वहां से किसी तरफ से भागने में सफल रही। वह उसके बाद मुस्तकीम से मिली और नया गिरोह खड़ा किया। गिरोह जब मजबूत बन गया तो फूलन ने 14 फरवरी, 1981 को बेहमई गांव पर धावा बोल दिया और 20 लोगों को गांव के बीच इकट्ठा कर गोलियों से भून डाला। इन बीस लोगों में से 17 एक ही जाति ठाकुर थे जबकि तीन लोग अन्य जातियों से थे। फूलन ने एक लड़की पर भी अपना गुस्सा निकाला था जो आजीवन अपंग रही।
घटना के बाद पीडि़त राजाराम सिंह ने राम अवतार, मुस्तकीम, फूलन, लल्लू समेत 35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मुस्तकीम व लल्लू समेत दस डकैतों को मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने अदालत में दाखिल चार्जशीट में फूलन समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा पर आरोप लगाए थे। 1983 में समर्पण के बाद फूलन ने उम्मेद सिंह नाम के व्यवसायी से शादी रचायी। हालांकि बाद में एक ठाकुर जाति से संबंध रखने वाले युवक ने फूलन की गोली मारकर हत्या कर दी।












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