अमिताभ को इंदिरा गांधी ने दिलाई थी पहली नौकरी वह भी सिफारिश से

इंदिरा ने बंगाल के राज्यपाल पद्मजा नायडू को एक पत्र लिखकर अतिताभ के लिए कोई उपयुक्त नौकरी ढूंढने के लिए कहा था। उसके बाद पद्मजा ने अमिताभ को पहली नौकरी कोलकता में दिलाई। इस बात का खुलासा इंदिरा के विश्वासपात्र रहे जनक राज जय ने अपनी किताब 'स्ट्रोक्स ऑन लॉ एंड डेमोक्रेसी इन इंडिया' में किया है।
इस किताब में जय ने कुछ और खुलासे किए हैं जिसमें शास्त्री कैबिनेट में इंदिरा के प्रवेश की बात भी शामिल है। वे लिखते हैं कि अपने पिता जवारलाल नेहरू के निधन के बाद शोकाकुल इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में शामिल हो गई थीं, क्योंकि उन्हें आभास था कि इंकार करने पर उनकी बुआ विजया लक्ष्मी पंडित को आमंत्रित किया जा सकता है, जिनसे उनके रिश्ते अच्छे नहीं थे। वह बताते हैं कि जब शास्त्री जी ने इंदिरा से अनुरोध किया कि नेहरू जी की अस्थियां इलाहाबाद के संगम में विसर्जित करने के बाद वह उनकी सरकार में शामिल हो जाएं तो शुरुआत में उन्होंने झिड़क दिया था।
जय अब 82 वर्ष के हो गए हैं। इस पुस्तक के अनुसार, शास्त्री जी ने इंदिरा से यह बात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टहलते हुए कही थी। वे लिखते हैं कि शास्त्री जी के आग्रह पर इंदिरा तमतमा गई थीं। उन्होंने जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री उनसे यह अपील तब कर रहे हैं, जब वह शोकमग्न हैं। "उन्होंने सममुच उन्हें झिड़क दिया था..शास्त्री जी को जरूर शर्मिदगी महसूस हुई होगी, क्योंकि इंदिरा ने यह बात मेरी मौजूदगी में कही थी।"
"शास्त्री जी को झिड़कने के बाद उन्हें पीछे छोड़कर इंदिरा तेजी से आगे बढ़ गई थीं।"तत्कालीन प्रधानमंत्री तब बुदबुदा उठे, "यदि इंदिरा मेरे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होती हैं तब मुझे विजय लक्ष्मी पंडित को शामिल होने के लिए कहना पड़ेगा।" लेखक बताते हैं कि उन्होंने यह बात थोड़े ही दिन बाद इंदिरा गांधी को बता दी।
जय कहते हैं, "मैंने पूरी ईमानदारी से सोचा था कि इंदिरा गांधी नए मंत्रिमंडल में शामिल होने योग्य उपयुक्त व्यक्ति हैं।" वह लिखते हैं, "जब इंदिरा गांधी को अहसास हुआ कि उनकी बुआ विजय लक्ष्मी मंत्री बन सकती हैं, तब उन्होंने मुझे से शास्त्री जी से मुलाकात का समय तय करवाने के लिए कहा।" जय के मुताबिक, आखिरकार इंदिरा गांधी शास्त्री जी से मिलीं और उनसे कहा कि उनके मंत्रिमंडल में शामिल होकर उन्हें गर्व महसूस होगा, लेकिन उन्होंने 'कोई हल्का मंत्रालय' देने के लिए कहा। उन्हें सूचना व प्रसारण मंत्री बनाया गया।












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