यूपी के बच्चे अब जन्म लेने से पहले ही होंगे ऑनलाइन

साफ शब्दों में कहें तो रिमाइंड पायलट परियोजना के तहत बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं का विवरण भी कंप्यूटर में कैद कर लिया जायेगा। जिसमें मां के नाम के साथ-साथ यदि मां-बाप चाहते हैं तो अपने होने वाले बच्चे का नाम भी दर्ज करा सकेंगे। हालांकि उसमें दो ऑप्शन होंगे लड़के और लड़की के।
एनआरएचएम के तहत तैयार इस योजना के अन्तर्गत आशाओं व एएनएम को एक-एक मोबाइल सेट दिया जा रहा है। मोबाइल सेट के जरिए वह प्रसूता की जानकारी को मिशन की साइट पर अपलोड करेंगी। अधिकारियों का कहना है कि उनके मोबाइल में एक साफ्टवेयर होगा जिसमें गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण होते ही उनकी प्रस्तावित प्रसव की तारीख, लगने वाले टीके, उनके लिए पौष्टिक आहार जैसी छोटी-बड़ी प्रत्येक जानकारी साइट पर दर्ज हो जाएगी जिसके बाद समय-समय पर आशाओं को गर्भवती महिला को लगने वाले टीकों आदि का रिमांडर मिलता रहेगा।
राज्य में गर्भवती महिलाओं को समय पर टीके लगेंगे तथा चिकित्सीय जांच हो सके इसके लिए रिमाइंड पायलट परियोजना शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत आशाओं को हाईटेक किया जा रहा है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले मिलने वाली सभी स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मुहैया कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं को उपरोक्त सुविधाएं मिलें इसमें आशाओं व एएनएम की मुख्य भूमिका होती है इस लिए आशाओं को मोबाइल दिए जा रहे हैं जो इस योजना के लिए आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार योजना के प्रथम चरण के लिए कौशम्बी जनपद का चुनाव किया गया है। जिले की आशाओं व एएनएम को एक-एक मोबाइल सेट मुहैया कराया गया है।
इन लोगों को दिए गए मोबाइल में एक विशेष साफ्टवेयर डाला गया है। इस साफ्टवेयर में ही गर्भवती महिलाओं के बारे में पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। सबसे पहले आशा को गर्भवती महिला का नाम, पति का नाम, उम्र, गर्भ की अवधि व उसके निवास आदि की जानकारी मोबाइल(साफ्टवेयर) में फीड करेगी। साफ्टवेयर में महिला नाम आदि की जानकारी डालते ही वह एनआरएचएम की वेबसाइट पर अपलोड हो जाएगी। इस जानकारी को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कभी भी देख सकेंगे।
मोबाइल में आशाओं के नाम से उनकी खुद की लॉग इन बनाई जाएगी। इसी लॉग इन के माध्यम से वह अपने सारे काम करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे विभाग को गर्भवती महिलाओं की विस्तृत जानकारी तो मिलेगी ही साथ आशाओं की सक्रियता का भी पता चल सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए एएनएम व आशा को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया है।












Click it and Unblock the Notifications