अन्ना का जनता 'मंतर' बन गया राजनीति 'मंतर'
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। टीम अन्ना ने उसी हमाम में उतरने की तैयारी कर ली है जिस हमाम में वो मंत्री-विधायक शामिल हैं जिन्हें वो हत्यारे, डकैत व बलात्कारी कहते हैं और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। अब टीम अन्ना जंतर मंतर से नहीं, बल्कि संसद से सरकार को ललकारने की तैयारी कर रही है। सीधे शब्दों में कहें तो जिस जंतर मंतर से अन्ना हजारे ने राजनीति को ललकारा था, भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाई थी और जनता में ये उम्मीद कि भ्रष्टाचार की जड़ की सफाई जन लोकपाल से ही हो सकती है, अब उसी जंतर मंतर पर अन्ना को एहसास हो चला है कि जन लोकपाल की खातिर राजनीति के दंगल में उतरे बिना काम नहीं चलेगा। सिर्फ सोलह महीने में अन्ना का जनता 'मंतर' बन गया राजनीति 'मंतर'।

आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि अन्ना हजारे ने कल शाम मंच से यह ऐलान किया था कि आज शाम 5 बजे वो और उनकी टीम अनशन समाप्त कर देगी। अन्ना के इस ऐलान के बाद से कई सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह कि क्या अन्ना के आंदोलन की मौत हो गई है? क्योंकि आंदोलन के दौरान ना तो सरकार ने हाल पूछा और ना ही विपक्ष ने कोई बात की। अन्ना को अनशन तोड़ने के लिये एक सम्मानजनक रास्ते की जरुरत थी मगर अफसोस कि ऐसा नहीं हुआ और सरकार को झुकाने के लिये जान देने का वादा कर रहे अन्ना हजारे ने 23 गणमान्यों की चिठ्ठी पढ़ अनशन तोड़ने का ऐलान कर दिया।
सवाल यह भी चर्चा में है कि अन्ना ने राजनीति की वकालत क्यों की? चर्चा तो इस बात की भी है कि जिस चिट्ठी से टीम अन्ना को अनशन तोड़ने का मौका मिल गया क्या वो प्रायोजित थी? फिलहाल टीम अन्ना के आंदोलन का पर्दा गिर चुका है। अब राजनीति के मैदान में टीम अन्ना देश के तमाम बड़े-छोटे दलों के सामने उतरेगी और लोकतंत्र की कसौटी पर जनता उन्हें परखेगी। मगर इन सबके अलावा टीम अन्ना के सामने चुनौतियों का अंबार खत्म नहीं होगा।
कांग्रेस ने टीम अन्ना के इस एलान का मजाक उड़ाया है। सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा है कि किस मकसद से बैठे थे वही जाने। मकसद स्पष्ट करें। लोगों का ध्यान आकृष्ट करें। उन्होंने कहा कि अन्ना ने राजनीति में आने का फैसला टेलीवजिन के जरिये किया है और राजनीति में आने के बाद समझेंगे मजबूरियां, जिम्मेदारियां। चुनावी राजनीति में प्रवेश के अन्ना के एलान के साथ ही जनलोकपाल आंदोलन का अंत तय हो गया है। जाहिर है इसके बाद सवा साल से चली आ रही लोकपाल की मांग ठंडे बस्ते में चली जाएगी। दूसरे 14 भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ जांच की मांग खत्म हो जाएगी और टीम अन्ना 2014 के आम चुनाव की तैयारियों में जुट जाएगी।











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