अखिलेश की मर्जी के खिलाफ मंत्री बने राजा भैया

सपा की ओर से इस मामले में सफाई देते हुए कहा गया कि मोहन सिंह की टिप्पणी से पार्टी कोई इत्तेफाक नहीं रखती। उधर सोमवार की शाम श्री सिंह ने अपने बयान को वापस लेते हुए माफी मांग ली।
दरअसल यह विवाद उस समय उठा जब गत 14 जुलाई को मोहन सिंह ने एक चैनल में कहा था कि मुख्यमंत्री को अखिलेश यादव को रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को मंत्री बनाये जाने पर गहरी आपत्ति थी। पार्टी इस बयान से नाराज दिखी। पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि मंत्रिमंडल के सदस्यों का चयन मु यमंत्री के विवेक पर होता है।
अखिलेश यादव ने बिना किसी दबाव के सहयोगियों का चयन किया। मोहन सिंह की इस बात का भी पार्टी ने प्रतिवाद किया कि अखिलेश सरकार ने पिछले दिनों जिस तरह से जल्दबाजी में फैसले किए उससे सरकार की किरकिरी हुई। पार्टी की ओर से कहा गया कि सरकार की कोई किरकिरी नहीं हुई। जिन निर्णयों पर अखिलेश यादव को जनसामान्य की असहमति दिखी उसे वापस लेकर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में उनकी गहरी आस्था है। चौधरी ने कहा कि अखिलेश में अनुभव की कमी के मोहन सिंह के कथन को भी पार्टी ने पंसद नहीं किया।
पार्टी ने दावा किया कि अखिलेश यादव राजनीति में नए नहीं हैं। उनको अनुभवहीन कहने वालों को सिर्फ इतना ही बताना काफी होगा कि किसी भी आपराधिक छवि वाले को पार्टी में न लेने का एलान कर अखिलेश यादव ने क्षण भर में पार्टी की छवि बदल दी थी। सपा प्रवक्ता ने मु यमंत्री को परिपक्व साबित करने के लिए बाकायदा उनका राजनीतिक सफर जारी किया। चौधरी ने कहा प्रदेश में सपा सरकार के चार माह पूरे हो गये हैं जो सफलता और उपलब्धियों का दिशा संकेत करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस बीच विधानमंडल सत्र में न केवल पूरी सक्रियता दिखाई बल्कि कार्यवाही में हिस्सा लेते हुए अपने संसदीय कौशल की भी छाप छोड़ी।












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