मोबाइल फोन से दबा कुचला महसूस कर रहीं खाप पंचायतें

Why Khap Panchayat banned mobile for women
हाल ही में बागपत की खाप पंचायत ने मोबाइल पर बात करने पर प्रतिबंध लगा दिया, वो भी उन महिलाओं पर जो 40 से कम हैं। महिलाओं को घूंघट में रहने, समान गोत्र में शादी न करने, आदि के फरमान सुनाने वाली खाप आखिर मोबाइल के खिलाफ क्‍यों हो गई? यह एक बड़ा सवाल है। यह सवाल इसलिए महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि पितृसत्‍ता को बढ़ावा देता है।

पिछले साल तक देश में ऑनर किलिंग की वारदातें तेजी से हुईं। अगर अपराध ब्‍यूरो के रिकॉर्ड देखें तो पिछले एक दशक में ऑनर किलिंग की वारदातों में वृद्धि सबसे तेज हुई है। खास बात यह है कि ऑनर किलिंग के मामले सबसे ज्‍यादा पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, एनसीआर के कुछ इलाकों और हरियाणा से आये, जहां खाप पंचायतें अभी भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

हाल ही में ऑनर किलिंग पर आधारित आमिर खान के शो सत्‍यमेव जयते में जिस तरह खाप पंचायत के एक प्रति‍निधि ने प्रेम संबंधों की खिलाफत की, उससे यह साफ हे कि सम्‍मान के लिये हुईं हत्‍याओं में कहीं न कहीं खाप पंचायतों का समर्थन रहा है। ऑनर किलिंग रोकने के लिये हरियाणा सरकार ने प्रेम-विवाह करने वालों को संरक्षण प्रदान करने के लिये योजना भी चलायी। आज हरियाणा में कोई भी प्रेमी जोड़ा शादी करने के बाद पुलिस की सुरक्षा प्राप्‍त कर सकता है।

प्रेम विवाह को कानूनी संरक्षण मिलने के बाद मानो खाप पंचायतें खुद को असहाय स महसूस करने लगी हैं। यही कारण है कि अब लड़कियों व युवतियों के मोबाइल पर बात करने पर प्रतिबंध लगाने के फरमान निकल कर सामने आये हैं।

एक दशक पीछे जाकर देखें तो घर के लैंडलाइन पर अगर किसी लड़की को बात करनी होती थी, तो घर वाले सामने बैठे रहते थे। पहले मां-बाप फोन उठाते थे, फोन करने वाले का पूरा ब्‍योरा लेते थे, तब लड़की बात कर पाती थी। आज लड़की के हाथ में मोबाइल है, वो चाहे तो ड्राइंग रूम में और चाहे बेडरूम में अकेले जाकर किसी से भी बात कर सकती है। सच पूछिए तो मोबाइल फोन ने महिलाओं को एक स्‍वतंत्रता की अनुभूति कराने जैसा कार्य किया है और यह स्‍वतंत्रता खाप को बर्दाश्‍त नहीं हो रही है।

साधारण मोबाइल से ऊपर उठें तो एक से एक स्‍मार्ट फोन बाजार में आ गये हैं। यानी कोई भी लड़की घर की कहीं भी बैठकर मोबाइल पर इंटरनेट ऐक्‍सेस कर सकती है और ढेर सारे दोस्‍त बना सकती है। यही नहीं अगर घर पर उस पर कोई अत्‍याचार होता है या किसी मुसीबत में फंस जाती है, तो वो मोबाइल के माध्‍यम से सीधे पुलिस को सूचना दे सकती है। यानी लड़की चाहे बागपत की हो या दिल्‍ली-बेंगलूरु की, उसे दबा कर नहीं रखा जा सकता। यही कारण है कि सदियों से लड़कियों को दबा कर रखने वाली खाप पंचायतें मोबाइल फोन की वजह से खुद दबा-कुचला महसूस कर रही हैं।

लेखक- प्रीति सिंह, पुणे की सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+