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मैं तो लंबे समय से खुद अपना पेशाब पीता रहा हूं: स्‍वामी अग्निवेश

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Social Activist Swami Agnivesh
बैगंलोर। पश्चिम बंगाल की विश्‍व भारती कॉलेज में छात्रा को पेशाब पिलाने वाली हॉस्‍टल वॉर्डन के पक्ष में स्‍वामी अग्निवेश उतर आये हैं। स्‍वामी ने कहा है कि हॉस्‍टल वॉर्डन ने अगर उस छात्रा को पेशाब पीने की सजा दी तो इसमें हंगामा क्‍यों हो रहा है। अपनी इस बात पर तर्क देते हुए स्‍वामी अग्निवेश ने कहा कि वह एमरजेंसी के दौरान अंबाला सेंट्रल जेल में कई दिनों तक वह खुद अपना पेशाब पीते रहे हैं।

उन्‍होंने कहा कि जब वह छोटे थे तो उन्‍हें विस्‍तर पर पेशाब करने की बिमारी थी और हर रोज विस्‍तर पर पेशाब कर देते थे। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई, चौधरी देवी लाल और जार्ज फर्नांडीज भी अपना मूत्र पीते रहे हैं और उन्‍हें इसका लाभ भी मिला है। अग्निवेश ने कहा कि इन सब फायदों को जानते हुए उन्‍हें अपना पेशाब पीने से कोई गुरेज नहीं है और अगर कोई पीता भी है या उसे पिलाया जाता है तो उसमें हंगामा नहीं होना चाहिए।

अग्निवेश ने कहा कि जैसे घर में मां बाप बच्‍चे को कुछ खाने पीने की सलाह देते हैं वैसे ही उस वॉर्डन ने भी उस लड़की को सलाह दी होगी तो इसमें हंगामा खड़ा करने की जरुरत क्‍या है। अग्निवेश ने कहा कि मीडिया ने जबरदस्‍ती इस इश्‍यू को खड़ा कर दिया। जबकि देश में इससे गंभीर इश्‍यू हैं। जिन पर मीडिया को चर्चा करना चाहिए। मालूम हो कि पश्विम बंगाल पश्विम बंगाल के विश्‍व भारती स्‍कूल के हॉस्‍टल में वॉर्डन ने एक छात्रा को जबरन पेशाब पिलाया था। उसने छात्रा को पेशाब पीने की सजा दी थी क्‍योंकि वह विस्‍तर पर पेशाब कर देती थी। इस खबर को पूरे देश की मीडिया में 'शर्मनाक घटना' के तौर पर रिपोर्ट किया गया। वॉर्डन को भी सस्‍पेंड कर दिया गया है।

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English summary
A nationwide outrage over a Visva-Bharati warden asking a class 5 student to drink her urine for bed-wetting notwithstanding, social activist Swami Agnivesh claimed on Tuesday that this was a "traditional cure" for such a condition.
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