आज भी कई सांसद हैं सरकारी वाहन, मेट्रो के सहारे

आरएसपी के प्रशांत कुमार मजुमदार ने कहा कि 50 से अधिक सांसद अभी संसद की ओर से उपलब्ध कराये गए वाहनों का उपयोग कर सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने जाते हैं। लेकिन यह व्यवस्था दुरूस्त नहीं है और हमें कभी कभी काफी इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार इंतजार करते करते हमें पैदल ही संसद जाना पड़ा है। हम इससे संतुष्ट नहीं हैं, हमें समय पर वाहन नहीं मिल पाता। कई सांसद इससे काफी क्षुब्ध हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या सांसद निधि से वाहन खरीदने की इजाजत दी जानी चाहिए, उन्होंने इतना ही कहा, सांसद निधि जनता और क्षेत्र के विकास कार्यो के लिए है, निजी उपयोग के लिए नहीं।
गौरतलब है कि सांसदों को प्रदत्त सुविधाओं के तहत कोई भी सांसद वाहन की खरीद के लिए चार लाख रूपया अथवा वाहन की कीमत, इनमें से जो भी कम हो, की अग्रिम राशि रिण के तौर पर प्राप्त करने का हकदार है। लेकिन अगर सदस्य के पास एक वाहन है तो अगले वाहन के लिये कोई अग्रिम राशि प्रदान नहीं की जायेगी। यह राशि ब्याज सहित सदस्य के वेतन से उसी तरह वसूल की जानी चाहिए जैसे एक सरकारी कर्मचारी के मामले में होता है लेकिन किसी भी कीमत पर यह 60 समान किस्तों से अधिक में नहीं होना चाहिए।
बोडोलैण्ड पीपुल्स फ्रांट के एस के बिसुमतियारी संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए सरकारी वाहन सेवा का उपयोग करने के साथ शहर में आने जाने के लिए दिल्ली मेट्रो का उपयोग करते हैं। बिसुमतियारी ने कहा कि दिल्ली में अपना वाहन रखना काफी खर्चीला है। पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा कई अन्य सुदूर क्षेत्र के सांसद राष्ट्रीय राजधानी में संसद की वाहन सेवा और दिल्ली मेट्रो का उपयोग करते हैं।
गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले सप्ताह विधानसभा में कहा था कि अब विधायक अपनी क्षेत्र विकास निधि से 20 लाख रुपये तक का वाहन खरीद सकेंगे। हालांकि उन्होंने दो दिन बाद ही अपने विवादास्पद निर्णय को वापस ले लिया। उन्होंने कहा था कि इच्छुक विधायक इस मूल्य पर वाहन खरीद सकेंगे। पांच साल के बाद विधायक मूल्य चुकाकर उस गाड़ी पर मालिकाना हक पा सकेंगे। लेकिन सरकार उन्हें वाहन के रखरखाव का खर्च नहीं देगी।












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