तैयार होगा बायोमैट्रिक डाटाबेस, ताकि न बने 'अपना घर'

Apna Ghar
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने बाल शोषण की घटनाओं पर अंकुश लगाने तथा बाल देखभाल संस्थानों की कार्य प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ तरीके से मॉनिटरिंग के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय इसलिये लिया गया है, ताकि भविष्‍य में रोहतक जैसे अपना घर कहीं और न बन सकें। अपना घर वो बाल गृह है, जहां बच्‍चों के यौन शोषण का भंडाफोड़ हाल ही में हुआ।

हरियाणा महिला एवं बला विकास विभाग की वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव धीरा खण्डेलवाल ने बताया कि रणनीति के तहत बच्चे की मैपिंग, उनका बायोमैट्रिक नमूने तथा नियमित स्वास्थ्य जांच, बाल देखभाल संस्थानों के पंजीकरण, कर्मचारियों का पुलिस द्वारा सत्यापन, सभी बाल देखभाल संस्थानों तथा इन संस्थानों में रह रही महिला तथा बच्चों के संबंध में सूचना एकत्रित करने के मानदंड शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि विभाग राज्य में कार्यरत सभी गैर सरकारी संगठनों के संबंध में विस्तृत सूचना रिपोर्ट मंगवा रहा है तथा विभाग के अधिकारी गैर सरकारी संगठनों तथा बाल देखभाल संस्थानों को विस्तृत रिपोर्ट के बारे सहायता उपलब्ध करवा रहे है। सभी बाल देखभाल संस्थानों को निर्देश दिये गये है कि वे अपने पंजीकरण की जानकारी निर्धारित प्रफार्मा में 30 जून तक भिजवाना सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए श्रीमती खण्डेलवाल ने बताया कि सभी बाल देखभाल संस्थानों तथा गृहों के लिए लैंडलाइन कनैक्शन तथा ई-मेल आईडी के प्रावधान अनिवार्य किये गये है।

सभी संस्थानों में बच्चों की मैपिंग का कार्य किया जा रहा है और यह कार्य शीघ्र ही पूरा होना अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि सभी गैर सरकारी संगठनों, बाल देखभाल संस्थानों, नियासों को अपने-अपने संगठन के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है तथा उनके कर्मचारियों एवं बच्चों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के लिए नियमित समय अवधि में बाल देखभाल संस्थान जायेंगे। उन्होंने बताया कि बाल देखभाग संस्थानों से कहा गया है कि जब भी उनके संस्थान में कोई नया बच्चा आता है अथवा कोई बच्चा संस्थान को छोड़ता है तो इसकी जानकारी तुरंत विभाग को दें।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राज्य में चल रहे अनाथालयों एवं आश्रय गृहों तथा बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले लोगों का बायोमैट्रिक डाटाबेस तैयार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य में सभी बाल देखभाग संस्थानों एवं गृहों के पंजीकरण तथा निरीक्षण के संबंध में उठाये गये सभी कदमों की जानकारी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को दे दी गई है। निरीक्षण समितियों ने 'डू एंड डोंट्सÓ के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये है।

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