प्रणव दादा ने दिया वित्त मंत्री पद से इस्तीफा

प्रणव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा सौपा। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैने अपने कार्यकाल में किसानों की गरीबी काफी नजदीक से देखी है। मैने आज तक जो भी फैसले हुए सारे जनहित में लिए। उन्होंने कहा कि राजनीति छोड़कर उनको काफी दुख हो रहा है। अब वित्त मंत्रालय के पद पर सस्पेंस बना हुआ है।
कुछ लोगों का कहना है कि वित्त मंत्रालय का पद पीएम मनमोहन सिंह अपने पास रखेंगे। वित्त मंत्री के पद को लेकर जब सुब्रमण्यम स्वामी के सामने चिदंबरम का नाम रखा गया तो उन्होंने कहा कि चिदंबरम को वित्त मंत्री का पद देना चाहिए, लेकिन तिहाड़ जेल में। प्रणव अपना इस्तीफा देने के बाद मीडिया बातचीत में कुछ खास बोलने से बचते रहे।
कांग्रेस को बिदाई देने के साथ ही आज प्रणव का रिश्ता औपचारिक रूप से खत्म हो गया। प्रणव सन 1978 में पहली बार सीडब्ल्यूसी के सदस्य बने थे। राष्ट्रपति पद के लिए 19 जुलाई को चुनाव होने वाले है। संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने बताया कि मुखर्जी के नामांकन के लिए दस्तावेज को चार सेट में बनाया गया है। हर सेट में 50 प्रस्तावकों और अनुबोधकों का नाम है।












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