धार्मिक नेता चाहे तो रूक सकती है भ्रूण हत्याएं

Uttar Pradesh Assembly minister Azam Khan
लखनऊ। भ्रूण हत्याओं पर अंकुश न लग पाने की मुख्य वजह धार्मिक संगठन है। यदि यह सहयोग करें तो इस पर रोक लगायी जा सकती है। विधानसभा में यह बात प्रदेश सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कही। उन्होंनें कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर कठोर कानून के रास्ते में अक्सर धार्मिक संगठन और धार्मिक नेता आते है।

यदि उनकी ओर से कठोर कानून की पहल हो तो राज्य सरकार भी कड़ा रवैया अपनायेगी और कन्या भ्रूण हत्या पर हत्या जैसा कडा कानून बनायेगी जिसमें आजीवन कारावास का प्रावधान होता है। श्री खां ने कहा कि यह नीच और घटिया काम है कि कोई डाक्टर पैसे की खातिर कन्या की भ्रूण में ही हत्या कर देता है या मां-बाप गरीबी के कारण इसलिये लड़की को कोख में ही मार देते हैं कि बड़े होने पर वह उसकी शादी या अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते।

वहीं परिवार कल्याण राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने भ्रूण हत्या के आरोपियों को हत्या के आरोप में मिलने वाली सजाओं आजीवन कारावास या मृत्युदण्ड का प्रावधान करने से साफ मना कर दिया और कहा कि इसके लिए केन्द्रीय कानून पहले से ही लागू है। भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना ने सरकार से जानना चाहा था कि क्या सरकार कन्या भ्रूण हत्या करने वालों के लिए भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 या 304 की तरह कोई प्रावधान करेगी, जिसमें आजीवन कारावास या मृत्युदण्ड की सजा मिल सके।

खन्ना ने कहा कि जिस तरह लिंग अनुपात में असंतुलन हो रहा है उसे रोकने के लिए कन्या भ्रूण हत्या करने वालों के खिलाफ हत्या के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कन्या भ्रूण हत्या करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों या इसे करवाने वाले के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलवाने की योजना से साफ इनकार किया और कहा कि इसके लिए तीन वर्ष की सजा व पचास हजार जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा ऐसी हरकत में दोषी पाये जाने पर पांच साल की सजा और एक लाख रूपये जुर्माने किया जाता है।

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