वाह रे देश! गरीबी के लिये 28 रुपये और टॉयलेट के लिये 35 लाख

इस बात का खुलासा सूचना के अधिकार कानून के माध्यम से आरटीआई कार्यकर्ता एससी अग्रवाल ने किया है। अब आप सुनकर चौक जायेंगे कि टॉयलेट के आधुनिकरण के लिये 35 लाख रुपये! जी हां उस टॉयलेट में एक्सेस कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है और इनका उपयोग करने वालों को कार्ड उपलब्ध कराए गए है। इतना ही नहीं टॉयलेट के गलियारे में कैमरे भी लगाए गए है। एक्सेस कंट्रोल सिस्टम को लगाने के लिए ही लगभग 5 लाख रुपए खर्च किए गए।
इस संबंध में योजना आयोग के कर्मचारियों का कहना है कि टॉयलेट में आय दिन चोरी और तोड़फोड़ होती थी जिस कारण से सुरक्षा इंतजाम जरुरी हो गए थे। मालूम हो कि अभी कुछ दिन पूर्व ही योजना आयोग ने कहा था कि 28 रुपये से ज्यादा खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं हो सकता है। मगर आरटीआई कार्यकर्ता के इस खुलासे ने एक सवाल खड़ा कर दिया है कि गरीबी को कम में परिभाषित करने के बाद शौचालय के आधुनिकीकरण में 35 लाख खर्च करना किस हद तक सही है। आप अपने सुझाव नीचे दिये गये कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं।












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