वाह रे देश! गरीबी के लिये 28 रुपये और टॉयलेट के लिये 35 लाख

Planning Commission spends, 35 lakh to renovate toilets Delhi
दिल्‍ली। हम जो आपको बताने जा रहे हैं उसे जानने के बाद आपके मुंह से अनायास ही निकल पड़ेगा कि वाह रे आयोग! योजना आयोग के आंकड़े दिन प्रतिदिन रोचक होते जा रहे हैं। आयोग ने जहां गरीबी को परिभाषित करते हुए कहा है कि 28 रुपये से अधिक खर्च करने वाला व्‍यक्ति गरीब नहीं है वहीं टॉयलेट (शौचालय) की मरम्‍मत और आधुनिक बनाने के लिये 35 लाख रुपये खर्च किये गये हैं। जी हां योजना भवन कार्यालय में दो शौचालयों की मरम्‍मत के लिये ये रकम खर्च किये गये हैं।

इस बात का खुलासा सूचना के अधिकार कानून के माध्‍यम से आरटीआई कार्यकर्ता एससी अग्रवाल ने किया है। अब आप सुनकर चौक जायेंगे कि टॉयलेट के आधुनिकरण के लिये 35 लाख रुपये! जी हां उस टॉयलेट में एक्सेस कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है और इनका उपयोग करने वालों को कार्ड उपलब्‍ध कराए गए है। इतना ही नहीं टॉयलेट के गलियारे में कैमरे भी लगाए गए है। एक्सेस कंट्रोल सिस्टम को लगाने के लिए ही लगभग 5 लाख रुपए खर्च किए गए।

इस संबंध में योजना आयोग के कर्मचारियों का कहना है कि टॉयलेट में आय‌ दिन चोरी और तोड़फोड़ होती थी जिस कारण से सुरक्षा इंतजाम जरुरी हो गए थे। मालूम हो कि अभी कुछ दिन पूर्व ही योजना आयोग ने कहा था कि 28 रुपये से ज्‍यादा खर्च करने वाला व्‍यक्ति गरीब नहीं हो सकता है। मगर आरटीआई कार्यकर्ता के इस खुलासे ने एक सवाल खड़ा कर दिया है कि गरीबी को कम में परिभाषित करने के बाद शौचालय के आधुनिकीकरण में 35 लाख खर्च करना किस हद तक सही है। आप अपने सुझाव नीचे दिये गये कमेंट बाक्‍स में लिख सकते हैं।

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