टैटू छपवाने वालों के लिए खुल सकते हैं भारतीय सेना के द्वार

यह भी देखने में आता है कि भर्ती के लिए युवा शरीर से टैटू निकलवाने में झोला छाप डॉक्टरों की मदद से टैटू वाले स्थान को आग से जला देते हैं। इससे इंफेक्शन का खतरा खड़ा हो जाता है। इसे देखते हुए टैटू को लेकर नियमों में कुछ छूट देने पर विचार किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को सेना हाईकमान के पास भेजा जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी की एआरओ अंबाला की भर्ती प्रक्रिया साल में एक या दो बार होती है। सैनिक जनरल डयूटी, हवलदार, शिक्षक , क्लर्क व स्टोरकीपर की भर्ती प्रक्रिया को ऑफिसर स्तर की भर्ती प्रक्रिया से भी ज्यादा सख्ती के साथ पूरा किया जाता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को दलालों के झांसे में नहीं आना चाहिए। सेना में भर्ती पूरी तरह से पारदर्शी होती है। उन्होंने कहा कि ऐसा शक होने पर भी प्रत्याशी को बाहर निकाल दिया जाएगा। युवा एक बात अच्छी तरह से समझ लें कि भर्ती में सिर्फ योग्यता ही एकमात्र माध्यम होती है। इस मौके पर ब्रिगेडियर राजेंद्र कुमार, ब्रिगेडियर संजय भाटिया, ब्रिगेडियर दीपक ओबराय, कर्नल एसके प्रसाद, कर्नल नितिन भाटिया, ले. कर्नल आमितोष चौहान आदि मौजूद थे।
यानी वो दिन दूर नहीं जब भारतीय सैनिक भी अमेरिकी सैनिकों की तरह अपने कंधों और बाहों में टैटू लगाये दिखेंगे।












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