सीइसी और चुनाव आय़ुक्त के लिए सक्रिय हुए आडवाणी

आडवाणी ने इस कोलेजियम में प्रधानमंत्री, कानूनी मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अलावा दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं को शामिल करने का सुझाव दिया है। आडवाणी का मानना है कि चुनाव आयुक्त की तरह सीएजी की नियुक्ति भी एक वृहद कोलेजियम के जरिए होनी चाहिए। कुरैशी से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर नवीन चावला की नियुक्ति से उपजे विवाद की ओर इशारा करते हुए आडवाणी ने कहा है कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगता है। इसके लिए आडवाणी ने चुनाव आयुक्तों के चुनाव की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया है। इसके तहत राष्ट्रपति चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है।
आडवाणी के अनुसार, इन सुधारों के लिए संविधान संशोधन की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। उन्होंने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 324 (2) का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसे संसद में साधारण बहुमत से कराया जा सकता है। इधर, आडवाणी के इस सुझाव पर केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सीईसी और सीएजी की नियुक्ति की वर्तमान प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं है। यह उनके अपने ब्लॉग से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। गौरतलब है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस. वाई. कुरैशी का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है, जबकि सीएजी विनोद राय का कार्यकाल अगले साल जनवरी में समाप्त हो रहा है।












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