क्‍या लापरवाह डॉक्‍टर कभी कह पायेंगे सत्‍यमेव जयते?

Hospital
आमिर खान के सत्‍यमेव जयते की मुहिम में शामिल होते हुए हम अपने ये सवाल रख रहे हैं। दूसरी घटना है मेरे पिता की मौत और डॉक्‍टरों की लापरवाही।

केस- 2: 2003 में मेरे पिताजी की तबियत खराब हुई। हम उन्‍हें लखनऊ के सबसे बड़े अस्‍पताल एसजीपीजीआई ले गये जहां गेस्‍ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में एक सीनियर डॉक्‍टर इलाज शुरू किया। हम हर महीने, दो महीने पर चेकअप के लिए जाते रहे। इस दौरान उनकी अपर और लोअर एंडोस्‍कोपी हुई। डॉक्‍टर ने कहा उन्‍हें लीवर सिरोसिस है। हम इलाज करते रहे और नवंबर 2004 में उनकी तबियत अचानक बिगड़ी। हम पीजीआई लेकर गये, उस समय इमर्जेंसी में कोई भी सीनियर डॉक्‍टर नहीं थे। एक जूनियर डॉक्‍टर ने पूरी तनमयता के साथ इलाज शुरू किया और शुरुआती परीक्षण के बाद जो उसने रिपोर्ट पेश की वो चौंकाने वाली थी।

जूनियर डॉक्‍टर की रिपोर्ट के मुताबिक पिताजी को सिरोसिस थी ही नहीं, उन्‍हें अल्‍सर था, वो भी एक साल पुराना उस दिन वो अल्‍सर अपनी लास्‍ट स्‍टेज पर पहुंच चुका था। तत्‍कालीन विभागाध्‍यक्ष जी चौधरी ने जब पिछले एक साल की सभी रिपोर्ट देखी तो वो खुद शॉक रह गये। उन्‍होंने उस डॉक्‍टर को बुलाया जो पिछले एक साल से इलाज कर रहा था। भरे वार्ड में उन्‍होंने कड़ी फटकार लगायी और पूछा कि एक साल से ज्‍यादा का अलसर आप डिटेक्‍ट नहीं कर पाये? ये देखिये 8 महीने पुरानी लोअर एंडोस्‍कोपी में अल्‍सर साफ दिख रहा है.....

डॉक्‍टरों ने एक तरफ इलाज शुरू किया और दूसरी तरफ अल्‍सर फूट गया और देखते ही देखते पिताजी के शरीर से सारा खून निकल गया। आलम यह था कि हाथ-पांव की नसों से जब डॉक्‍टर को खून नहीं मिला तो टेस्टिंग के लिए उनकी गर्दन की नस से खून लिया गया। रात को रक्‍तचाप इतना कम हो गया कि एक ही हार्ट अटैक में वो चल बसे। जरा सोचिये अगर डॉक्‍टर ने आठ महीने पहले रिपोर्ट ध्‍यान से देखी होती तो शायद आज मैं यह लेख नहीं लिख रहा होता। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कुछ ही दिनों बाद उसी डॉक्‍टर का प्रोमोशन हो गया। मेरी तरह लाखों लोग रोजाना ऐसे डॉक्‍टरों के खिलाफ सिर्फ इसलिए आवाज नहीं उठाते, क्‍योंकि जाने वाला अब लौटकर नहीं आयेगा, लिहाजा कुछ भी करने से कोई फायदा नहीं।

हमारे सवाल- डॉक्‍टर की ऐसी लापरवाही के लिए कोई सजा निर्धारित होनी चाहिये या नहीं? क्‍या ऐसे डॉक्‍टर को एसजीपीजीआई जैसे अस्‍पताल में नौकरी करने का कोई अधिकार है?

NEXT में- कैसे हुई इलाज के नाम पर किशोरी की हत्‍या!

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