सत्‍यमेव जयते की मुहिम और लखनऊ का 'महिमा केस'

Satyamev Jayate
बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए आमिर खान के सत्‍यमेव जयते की मुहिम में शामिल होते हुए हम पेश कर रहे हैं तीसरा मामला- लखनऊ का 'महिमा केस' जिसमें मीडिया ने मुहिम छेड़ दी थी।

केस- 3: मेरी 15 वर्षीय मौसेरी बहन महिमा सक्‍सेना। 2007 में उसे अचानक बुखार आया। बुखार ज्‍यादा लंबा खिंच गया तो मेरे मौसाजी ने उसे एसजीपीजीआई में भर्ती दिखाया। वहां उसे भर्ती कर इलाज शुरू हुआ। डॉक्‍टर ने कहा महिमा को दिमागी बुखार है यानी जैपनीज़ इंसेफलाइटिस है और इलाज शुरू कर दिया। अच्‍छा इलाज देख कर महिमा के पिता एके सक्‍सेना को महसूस हुआ कि जल्‍द ही उनकी बेटी ठीक हो जायेगी। कुछ दिन बाद डॉक्‍टर ने कहा कि महिमा कोमा में चली गई है। वो शाम को राउंड पर आये और रिपोर्ट देखकर बोले घबराइये नहीं महिमा जल्‍द कोमा से बाहर आ जायेगी।

यह बात सुन महिमा के माता-पिता को खासी राहत मिली, लेकिन उन्‍हें नहीं पता था कि आज रात क्‍या होने वाला है महिमा के साथ। रात को महिमा वार्ड में सो रही थी। उसके पिता बगल की बेंच पर बैठे अपनी बेटी को आशा भरी निगाहों से देख रहे थे। तभी रात के करीब डेढ़ बजे कुछ डॉक्‍टरों की टीम आयी। उनके पास कुछ मशीनें और औजार थे।

उन्‍होंने बेड को चारों तरफ से कवर किया और पिता के सामने ही महिमा के मुंह में एक शिकंजा नुमा औजार फिट कर दिया, ताकि उसका मुंह बंद नहीं हो। डॉक्‍टरों ने उसके मुंह में कुछ औजार डाले और कुछ करने लगे। यह सब उसके पिता से देखा नहीं जा रहा था, तभी डॉक्‍टरों ने उन्‍हें बाहर कर दिया। कुछ देर बाद महिमा के पिता को महिमा की चीख सुनाई दी। वो दौड़ कर उसके पास पहुंचे तो देखा महिमा मर चुकी थी, उसके मुंह से खून निकल रहा था।

इस केस के बाद पीजीआई पर लखनऊ के मीडिया ने तमाम सवाल उठाये- दिमागी बुखार से मुंह की सर्जरी का क्‍या ताल्‍लुक था? अगर महिमा कोमा में थी तो चीखी कैसे? महिमा के मुंह में या गले में किसी प्रकार का इंफेक्‍शन नहीं था तो उसके मुंह को शिकंजे में क्‍यों फंसाया गया? टीवी चैनलों पर भी महिमा की मौत को डॉक्‍टरों द्वारा हत्‍या बताया गया, लेकिन परिणाम क्‍या हुआ यह सुनकर आप हैरान हो जायेंगे। पीजीआई ने डॉक्‍टर के खिलाफ एक भी कार्रवाई नहीं की। और तो और डॉक्‍टर थोड़े ही दिन बाद दिल्‍ली के एम्‍स में अच्‍छे पद पर चला गया। बाद में पता चला कि रात को डॉक्‍टरों ने जो कुछ भी किया वो उनके रिसर्च का एक पार्ट था।

हमारा सवाल: बड़े अस्‍पतालों में होने वाले रिसर्च में इंसान की जिंदगी दांव पर क्‍यों लगायी जाती है?

इन इन सवालों को उठाने के साथ सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि ये तीन घटनाएं सिर्फ मेरे जीवन की नहीं हैं, बल्कि ऐसी लाखों घटनाएं रोज़ाना देश के कई अस्‍पतालों में घटती है और मेरे जैसे लाखों लोग अपने-अपनों को खो देते हैं। सरकार से एक दरख्‍वास्‍त है- अगर आमिर खान ने एक अलख जगाई है, तो उस पर ऐक्‍शन जरूर लिया जाये, क्‍योंकि तभी हम देश के सामने सिर उठाकर कह सकेंगे सत्‍यमेव जयते!

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