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मायावती के करीबी अधिकारी सीबीआई के निशाने पर

Mayawati
लखनऊ। माया की इच्छाओं को शत प्रतिशत पूरा कराने वाले अधिकारियों पर किसी भी समय गाज गिर सकती है। उत्‍तर प्रदेश के बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के घोटाले में माया की करीबी अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं। एनआरएचएम घोटाले तथा डबल सीएमओ मर्डर मामले में अब मायावती के खासम खास रहे अधिकारियों के नाम सामने आने से ब्यूरोक्रेट्स में हलचल मच गयी है।

माया सरकार के कददावर अधिकारियों का नाम उस वक्त प्रकाश में आया जब सीबीआई ने पूर्व प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेह बहादुर के कार्यालय के कर्मचारियों से डा. विनोद आर्या और डा. बी.पी.सिंह तथा उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. योगन्द्र सचान की जिला जेल में हुई संदिग्ध मौत के बारे में पूछताछ की है।

सूत्रों के अनुसार मायावती कार्यकाल में मंत्रिमंडलीय सचिव रहे शशांक शेखर सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह तथा कुंवर फतेह बहादुर से आने वाले दिनों में पूछताछ की जा सकती है। ज्ञात हो कि पूर्व पुलिस महानिदेशक और मंत्रिमंडलीय सचिव ने उप मुख्य चिकित्साअधिकारी की जेल में हुई संदिग्ध मौत को आत्महत्या बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी जबकि डा. सचान के घावों के कई गहरे निशान थे तथा उनका शव जेल के शौेचालय में लटकता पाया गया था।

सीबीआई ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा और बसपा विधायक रामू द्विवेदी से पूछताछ के बाद दोनों मुख्य चिकित्सा अधिकारी की हत्या के कारणों के कुछ अहम सुराग पता लगा लिए हैं। सीबीआई का मानना है कि लखनऊ पुलिस ही नहीं बल्कि जांच में लगी स्पेशल टास्क फोर्स भी बड़े अधिकारियों के इशारे पर काम करती रही। सीबीआई ने कुंवर फतेह बहादुर के कार्यालय के कर्मचारियों के साथ दो दिन तक पूछताछ की। जांच एजेंसी के एक अधिकारी के अनुसार जरूरत हुई तो करमवीर सिंह, शशांक शेखर व कुंवर फतेहबादुर सिंह से पूछताछ की जा सकती है।

सीबीआई सूत्रों ने कहा कि दोनों मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या के अलावा जेल में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संदिग्ध मौत में भी कुछ बडे अधिकारियों का हाथ है जबकि संदिग्ध मौत को आत्महत्या बताने में पूरे प्रयास किये गये हैं। मालूम हो कि डिप्टी सीएमओ डा. सचान ने अपनी मौत से पहले कागज के टुकडे पर कुछ लिखकर दिया था जो अब गायब है। जो एक महत्वपूर्ण सबूत हो सकता था। दोनों मुख्य चिकित्सा अधिकारी की हत्या में इस्तेमाल किये गये हथियार को भी बरामद करने का दावा पुलिस और एसटीएफ ने किया था। लखनऊ पुलिस का दावा था कि एक ही हथियार से दोनो हत्या की गयी थीं।

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