शूटरों के पनाहगारों को तलाश रही सीबीआई

हालांकि इससे पहले सीबीआइ एक बार शूटरों को पनाह देने वाले प्रभावशाली लोगों को टटोलने कर उनसे कुछ और जानकारियां निकालने की इरादा कर रही है। डा. शुक्ला को सीबीआई ने दोबारा रिमाण्ड पर ले लिया और उम्मीद है कि इस बार वह कुछ जरूर बताएंगे।
सूत्रों के अनुसार सीबीआइ की पहली रिमाण्ड में डा. शुक्ला कोई ऐसा राज नहीं खोला जिससे किसी बड़े पर सीबीआई का शिकंजा सकता लेकिन अंटू मिश्रा के तीन अन्य सिम कार्ड से कुछ राज अवश्य पता चल गए। अंटू के तीन सिम के बारे में दी गई जानकारी भी शुक्ला की योजना का ही हिस्सा मानी जा रही है हालांकि सीबीआइ यह मानती है कि यह एक बड़ी उपलब्धि है और इसके जरिए पूरे मामले में व्यापक रोशनी पड़ेगी और खुद अंटू के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।
वैसे अंटू और एमएलसी रामू द्विवेदी से मिली जानकारियां भी सीबीआइ को शूटरों की तलाश के लिए दिशा नहीं दे पा रही हैं। सीबीआई ने सोमवार को न किसी को पूछताछ के लिए बुलाया गया और न ही किसी के यहां जाकर पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार सोमवार को दिन भर सीबीआई होमवर्क करती रही। सीबीआई अब महसूस कर रही है कि कुछ बड़ों की गिरफ्तारी के बगैर जांच आगे नहीं बड़ सकती।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र, डा. शुक्ला और एमएलसी रामू द्विवेदी की काल डिटेल रिपोर्ट को खंगालने के बाद कुछ ऐसे नंबर सीबीआइ को हासिल हुए हैं जिन पर यह आशंका है कि वे शूटरों के पनाहगार हो सकते हैं। संभव है कि सीबीआइ पहले इन्हें टटोलने के बाद फिर अपना बड़ा कदम आगे बढ़ाए। सूत्रों के अनुसार सीबीआइ को अब तक जो सबूत मिले वह शूटरों के पूर्वाचल लिंक को पुख्ता करते हैं।
इसमें पूर्वांचल के एक नये व्यापारी का नाम भी उभरा है। उसका नाम एनआरएचएम घोटाले में भी सामने आया था और बसपा शासन के दौरान पूरे महकमे में उसकी काफी चलती थी। लेकिन हत्या की अब तक की विवेचना में सीधे तौर पर उसकी संलिप्तता के साक्ष्य अब तक नहीं मिले हैं। इसीलिए सीबीआइ को यह भी आशंका है कि कहीं उसका नाम इस पूरी थ्योरी में साजिशन तो नहीं डाला जा रहा। इस बीच एक बाहुबली नेता का नाम उभरने के बाद जांच का दायरा उस तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।












Click it and Unblock the Notifications