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फतवा: किराए की कोख का सहारा लेना इस्लाम में नाजायज

Muslim Women
नयी दिल्ली। देश की प्रमुख इस्लामी संस्था बरेली मरकज ने कहा है कि कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफीशियल इंसेमीनेशन) के जरिए संतान सुख प्राप्त करना और किराए की कोख (सरोगेसी) का सहारा लेना इस्लामी नजरिए से नाजायज है। बरेली मरकज के दारूल इफ्ता ने एक सवाल के जवाब में जो फतवा जारी किया है, उसमें मुसलमानों को कृत्रिम गर्भाधान और किराए की कोख से बचने की सलाह दी गई है।

बरेली मरकज बरेलवी मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था है। दारूल इफ्ता के प्रमुख मुफ्ती कफील अहमद की ओर से जारी फतवे में कहा गया है कि इस्लाम में अप्राकृतिक ढंग से संतान सुख पाने की मनाही है। इंसानी रवायत में जो तरीके हैं, वही सही हैं। टेस्ट ट्यूब बेबी अथवा कृत्रिम गर्भाधान तथा सरोगेट मदर की बात नाजायज है।

बरेली मरकज की ओर से जिस सवाल के जवाब में फतवा आया है, उसमें एक युवक ने पूछा था कि अगर कोई मुस्लिम दंपति किसी कारण से संतान सुख की प्राप्ति नहीं कर पा रहा है और वह बच्चा गोद भी नहीं लेना चाहता तो क्या वह कृत्रिम गर्भाधान का सहारा ले सकता है? सरोगेट मदर का सहारा लेना कितना जायज है?

कृत्रिम गर्भाधान का सहारा अमूमन वे दंपति लेते हैं, जिनमें किसी तरह का शारीरिक विकार होता है। कभी-कभी अकेले रहने वाली महिलाएं भी संतान सुख के लिए किसी डोनर के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान का सहारा लेती हैं। दूसरी ओर किराए की कोख लेने का चलन भी इन दिनों तेजी से बढ़ा है।

किराए की कोख का मतलब किसी दंपत्ति का बच्चा अन्य किसी महिला के कोख में पलता है और इसकी एवज में इस महिला को पैसे दिए जाते हैं। कुछ महीने पहले मशहूर अभिनेता आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव भी सरोगेट मदर के जरिए ही माता पिता बने थे। इस फतवे के बारे में मुफ्ती कफील ने भाषा से कहा क‍ि हम मुसलमानों से यह कहना चाहेंगे कि वे कृत्रिम गर्भाधान का सहारा किसी सूरत में नहीं लें।

इसकी इस्लाम इजाजत नहीं देता है। किराए की कोख लेने की भी इजाजत हमारे मजहब में नहीं दी गई है। एक अन्य प्रमुख मुस्लिम शिक्षण संस्था दारूल उलूम देवबंद ने कृत्रिम गर्भाधान से जुड़े एक सवाल पर कहा कि इस्लाम में संतान सुख के लिए अप्राकृतिक माध्यम का सहारा लेना उचित नहीं है। इसके साथ ही दारूल उलूम ने सवाल पूछने वाले युवक से कहा कि आपका सवाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह पूरी तरह स्पष्ट हो तो इस पर कुछ फतवा दिया जा सकता है।

उधर, कृत्रिम गर्भाधान मामलों की विशेषज्ञ और कैलाश एवं फोर्टिस अस्पताल से जुड़ी चिकित्सक डॉक्टर राखी गुप्ता का कहना है कि समाज में कृत्रिम गर्भाधान को लेकर जागरूकता बढ़ी है और इसके साथ ही मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। हमारे यहां तो समाज के हर तबके के लोग आते है। इनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी शामिल हैं। कृत्रिम गर्भाधान के लेकर समाज में जागरूकता बढ़ी है।

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