महिलाओं को भोग की वस्तु के रूप में परोसा तो खैर नहीं

विज्ञापन 2- एक प्रतिष्ठित शेविंग क्रीम का विज्ञापन आता है, जिसमें एक महिला कम वस्त्रों में अश्लील इशारे करते हुए हीरो के गाल को किस कर लेती है। विज्ञापन के पीछे तर्क यही है कि इस शेविंग क्रीम लगाने की वजह से ही लड़की ने उसे किस किया।
विज्ञापन 3- एक कॉफी के विज्ञापन में एक प्रसिद्ध अभिनेत्री डांस कर रही है और उसकी कमर हिल रही है। जबकि कॉफी और कमर का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है।
विज्ञापन 4- एक बिस्किट के विज्ञापन में एक प्रसिद्ध अभिनेता एक हीरोइन के साथ उत्तेजक अदाओं के साथ बिस्किट खाने के प्रयास करते हैं।
ये तो महज चार उदाहरण हैं। देश में तमाम ऐसे विज्ञापन हैं जो औरत को उपभोग की वस्तु के रूप में परोस रहे हैं। लेकिन अब यह सब ज्यादा दिन नहीं चलेगा, क्योंकि सरकार ने ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कमर कस ली है। आज टीवी पर दिखाया जाने वाला कोई भी विज्ञापन हो उसमें उत्तेजक अंदाज में महिला का
दिखना एक आम बात है।
या दूसरे शब्दों में कहे तो विज्ञापनों में अश्लीलता अब अपनी हद पार करती नजर आ रही है। आज महिलाओं को केन्द्रित कर उन्हें उपभोग की वस्तु के रूप में दिखाया जा रहा है। अब जल्द ही सरकार ऐसे विज्ञापनों और उनको प्रसारित करने वाले टीवी चैनलों पर गाज गिराने वाली है। ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने के उपायों पर राजनीतिक दलों की राय एवं सहमति लेने के लिए सरकार जल्द एक सर्वदलीय बैठक बुलाएगी। जहां ऐसे विज्ञापनों पर गहनता से विचार विमर्श किया जायगा।
आपको बताते चलें की इससे पूर्व विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सुझाव रखा था कि सरकार अगर सर्वदलीय बैठक बुलाती है तो विपक्षी दल अश्लील विज्ञापनों पर रोक लगाने
के लिए न केवल अपनी राय एवं सलाह देंगे बल्कि ऐसा करने के लिए सरकारका सहयोग और समर्थन भी करेंगे।वहीं अश्लील और महिलाओं को उपभोग की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने वाले विज्ञापनों पर फौरन रोक लगाने की विपक्ष की मांग के बीच सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि वैसे तो संविधान में इसके लिए 15 कानून मौजूद हैं और उनका मंत्रालय इन कानूनों की मदद लेकर इन पर रोक लगाने के लिए प्रयास कर रहा है।लेकिन विषय पर कड़े कानून के अभाव में मंत्रालय ऐसा नहीं कर पाता। इसलिए इस दिशा में सही निर्णय लेने के लिए संसद के सभी सदस्यों का सहयोग चाहिए।
साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्री ने ये भी कहा है मंत्रालय की हिदायतों की बार बार अनदेखी को अब गंभीरता से लिया जायगा और टीवी चैनलों के लाइसेंस को आवंटित करते समय इस बात का ख्याल रखा जायगा की यदि चैनल नियमों की अनदेखी करते हैं तो उन्हें टेलीविजन केबिल नेटवर्क से हटा दिया जाए। गौरतलब है की इस बीच कई संस्थाओं ने टीवी पर दिखाए जाने वाले अश्लील विज्ञापनों पर मुहीम चला रखी है। जहां उनकी मांग है की सरकार इन विज्ञापनों पर कड़े कदम उठाते हुए इनको जनहित में फौरन बंद करे।












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