अब दिल्ली के चश्मे से यूपी को नहीं देखेगी कांग्रेस

Rahul Gandhi
लखनऊ। कांग्रेस को देर से ही सही लेकिन अब यह बात पूरी तरह से समझ में आ चुकी है कि दिल्ली के चश्मे से यूपी को नहीं देखना चाहिए। यूपी चुनाव में इसका खामियाजा भुगत चुकी पार्टी ने अब तय किया है कि वह हवाई नेताओं के सहारे नहीं बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं को मजबूत का लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

पार्टी नेतृत्व को समझ में आने लगा है कि नेताओं की फौज की बजाय वहां जमीनी स्तर पर एक बार फिर से कार्यकर्ताओं को मजबूत करना होगा और इसके लिए जरूरी है कि राज्य पार्टी की कमान ऐसे मजबूत हाथों में दी जाए जो कार्यकर्ताओं के बीच का आदमी हो। उसका न केवल अपना जनाधार हो, बल्कि जमीनी स्तर पर जिसने कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के लिए संघर्ष भी किया हो।

राज्य में हार के कारणों का पता लगाने के लिए गठित की गई एंटनी कमेटी की रिपोर्ट में भी कुछ इसी तरह के सुझाव दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो एंटनी कमेटी और टीम राहुल से राज्य के तीन दर्जन से अधिक प्रतिनिधिमंडलों ने मिलकर मांग की है कि राज्य में पार्टी को खड़ा करने के लिए दिल्ली के नेताओं को थोपने की बजाय राज्य में सक्रिय ऐसे नेता को कमान दी जाए जो कायर्कर्ताओं में न केवल नया जोश भरने में सक्षम हो, बल्कि उनकी बात सुनने को भी उपलब्ध रहे।

बताया जाता है कि राहुल गांधी और एंटनी कमेटी से यह भी कहा गया है कि राज्य से केन्द्र में आधा दर्जन से अधिक मंत्री हैं। राज्य में खुद कई कद्दावर नेता हैं। बावजूद इसके संगठन के अभाव का रोना क्यों है। संगठन है, लेकिन जरूरत उसमें जान फूंकने की है और यह काम वही कर सकता है जो न केवल कार्यकर्ताओं के बीच का हो, बल्कि जमीनी स्तर पर जुड़ा हुआ भी हो।

बताया जाता है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद से खुद पार्टी महासचिव राहुल गांधी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जरूरत नेताओं की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव पूर्व ही इस तरह का बयान दे चुकी थीं।

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