दबंग सांसद पर हाथ डालने से कतरा रही सीबीआई

सूत्रों की माने तो पूरे प्रकरण में बसपा के दबंग सांसद का नाम प्रमुखता से सामने आया था लेकिन सीबीआई उस ओर से मुंह फेरे बैठी है। मामले की जांच के छह माह से अधिक हो रहे हैं लेकिन अभी पुलिस दबंग सांसद से पूछताछ की हिम्मत नहीं जुटा सकी है।
प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का का 3 हजार करोड़ रुपया नेताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों व ठेकेदारों ने मिलकर डकार लिया लेकिन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई अभी तक किसी के नाम को खुलासा नहीं कर सकी है।
अभी बस पूछताछ का क्रम चल रहा है। सीबीआई अधिकारी कभी प्रदेश के विभिन्न जिलों के सीएमओ व सीएमएस से पूछताछ करती है तो कभी कर्मचारियों से लेकिन उसे कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है।
गौरतलब है कि राजधानी के डबल सीएमओ हत्याकाण्ड व एक डिप्टी सीएमओ की जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत के बाद एक सांसद का नाम तेजी से सामने आया। बसपा के इस कद्दावर सांसद को पुलिस मुख्यालय में बुलाकर पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह ने भी पूछताछ की थी लेकिन पुलिस सीधे तौर पर उस पर हाथ डालने से कतराती रही।
मामला सीबीआई के पास जाने के बाद भी सांसद पर किसी ने उंगली नहीं उठायी। पुलिस सूत्रों के अनुसार डिप्टी सीएमओ डा. वाईएस सचान की जेल में मौत के बाद ऐसे सबूत मिले थे कि इसमें उपरोक्त सांसद का हाथ है लेकिन पुलिस के आला अधिकाारियों के इशारे पर सांसद के नाम पर चुप्पी साध ली गयी।
इतना ही नहीं एक जेलर की लखनऊ जेल में तैनाती को लेकर भी विवाद हुआ था जिसमें सांसद का नाम प्रकाश में आया लेकिन पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दर्ज करायी गयी। अब डा. एके शुक्ला व प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस सांसद के बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सांसद का कई मामलों में हस्तक्षेप रहा लेकिन जाने क्यों सीबीआई सांसद का नाम नहीं ले रही है।












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