'गुजरात दंगे रोकने के लिए मोदी ने किये थे हर संभव उपाये'

अहमदाबाद। गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कहा है कि राज्‍य के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह आरोप लगाना गलत होगा कि उन्‍होंने 2002 के दंगों को हवा दी थी, बल्कि सच तो यह है कि उन्‍होंने दंगों को रोकने की हर संभव कोशिशें की थीं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने कहा कि 2006 में एक दंगा पीड़ित ने यह भी कहा था कि मोदी के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का इसमें कोई औचित्‍य नहीं है। दंगों के दौरान मारे गये कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान एसआईटी ने कोर्ट से कहा कि उनके द्वारा लगाये गये आरोप विचार करने योग्‍य नहीं हैं। एसआईटी ने कहा कि चार साल बाद शिकायत दर्ज करने का क्‍या औचित्‍य है।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट से कहा कि मोदी पर इस तरह के आरोप लगाना कि उन्‍होंने गोधरा कांड के बाद पुलिस से अपना गुस्‍सा निकालने के लिए कहा, बिलकुल बेबुनियाद है। उसका कोई आधार नहीं है। अगर एक बार आरोपों को सही भी मान लिया जाये तो भी यह अपराध नहीं बनता क्‍योंकि ये आरोप कहीं भी सिद्ध नहीं हैं।

एसआईटी के इस बयान से साफ है कि मोदी का गुजरात दंगों को भड़काने में कोई हाथ नहीं था, बल्कि सच तो यही है कि उन्‍होंने दंगे रोकने के लिए पुलिस को सख्‍त निर्देश दिये।

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