2004 में ही पूरी हो गयी थी सजा, रिहाई होगी अब

सुरजीत को जिया-उल-हक के शासन काल में सीमा के पास से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसको मौत की सजा सुनाई गयी थी, लेकिन उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति इशाक खान ने उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। इस लिहाज से उसकी सजा तो 2004 में ही पूरी हो चुकी है।
पंजाब सरकार ने लाहौर हाईकोर्ट को बताया कि सुरजीत की सजा पूरी हो चुकी है, अब उसे आजाद कर दिया जाएगा। पिछले माह सुरजीत को नजरबंद का दर्जा दिया गया था। उस समय कोर्ट सुरजीत की रिहाई के लिए पाकिस्तानी वकील शेख की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
भारतीय कैदी सुरजीत के पाकिस्तानी वकील अवैस शेख द्वारा रिहाई के लिए दायर की गयी याचिका पर न्यायाधीश ने सुनवाई की। वर्ष 1990 में हुए बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के आरोप में उसको दोषी करार दिया गया था। उन्होंने रिहा किये जाने की वकालत की, लेकिन पंजाब सरकार के जवाब के बाद कोर्ट ने सुनवाई जुलाई तक स्थगित कर दी है












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