बोफोर्स के गोलों से बचने के लिये सरकार ने खींची 'सचिन' रेखा

2 जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल और आदर्श सोसायटी जैसे घोटालों से केंद्र सरकार अभी उभरी भी नहीं थी कि बोफोर्स घोटाले के जिन्न ने कांग्रेस को अपनी जद में ले लिया। सदन की कार्यवाही चल रही थी और भाजपा ने संसद के अंदर कांग्रेस पर बोफोर्स के गोले दागने शुरु कर दिये। संसद में जबदस्त हंगामा हुआ और सोनिया गांधी को बोफोर्स मसले पर कटघरे में खड़ा कर दिया गया।
अब कांग्रेस के पास अपनी साख बचाने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में कांग्रेस के अलाकामानों ने एक रास्ता निकाला। सचिन के लिये सियासी पिच तैयार की गई और टॉस की जगह उनका नाम उछाल दिया। सचिन के नाम मात्र से राजनीतिक पार्टियों और मीडिया का ध्यान बोफोर्स घोटाले से भटक गया है और कांग्रेस बोफोर्स के गोलों से बच गई। इसे सोची समझी साजिश ही कहेंगे वरना सचिन को राज्यसभा सदस्य मनोनित करने की कवायत तो पहले से ही चल रही थी।
आपको याद होगा कि सचिन के सौवें शतक के बाद मुकेश अंबानी के घर एक पार्टी का आयोजन किया गया था। जानकारों का मनना है कि उस पार्टी से ही सचिन के लिये राजनीति की पिच तैयार की जाने लगी थी। यह पहली बार नहीं है जब यूपीए सरकार ने अपनी चालाकी के बल पर मीडिया का ध्यान और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं को भटका दिया हो। इससे पहले जब जब सरकार ने पेट्रोल के दाम बढ़ायें हैं और हाय-हाय हुई है तब-तब सरकार ने कोई ऐसा सिगुफा छोड़ दिया है जिससे लोगों का ध्यान उस मुद्दे से भटक जाये।
सितंबर 2011 में पेट्रोल के दाम बढ़े थे, तब कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव को उलटा सीधा कह दिया था। वहीं उसके अगली बार दाम बढ़ने पर अन्ना हजारे को छेड़ दिया गया। इसी तरह हर बार कांग्रेस अपनी कमजोरी छिपाने के लिए कोई न कोई मुद्दा छेड़ने में काफी माहिर हो चुकी है और इस बार भी वो सफल हो गई।












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