अपमान के अग्निपथ पर 25 साल बाद मिली विजय

अब अमिताभ बच्चन की करें तो बोफोर्स कांड का जिन्न इस बार बोतल से निकला तो बच्चन परिवार के दामन पर ढाई दशक से चिपके दागों को साफ कर गया। मगर कहीं ना कहीं अमिताभ के दिल पर लगे कसक को नहीं मिटा सका। बुधवार को अमिताभ बच्चन ने अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाया और दिल के अंदर दफ्न जख्मों को बाहर निकाल दिया। अमिताभ ने कहा कि मुझे खेद एक ही बात की है कि 25 सालों तक हमें इस बदनामी के साथ रहना पड़ा। तब हम जवान थे। लड़े और सह लिया, लेकिन मां और बाबू जी के लिए दुख होता है। उनके मन में एक क्लेश था। उनके जीते जी हम सफाई नहीं दे पाए। वैसे हमने खुद को निर्दोष तो बताया, लेकिन आज वे जीवित होते तो बहुत खुश होते।
यह कहते हुए सदी के महानायक भावुक हो गये और शिकायत भरे लहजे में कहा कि अगर स्टेन लिंडस्ट्राम को सच पहले से पता था तो उन्होंने 25 साल क्यों लगाए? अमिताभ ने बयां किया कि उस समय बदनामी होती थी, तरह तरह की गालियां पड़ती थीं। यहां तक कि बाबू जी ने एक दिन बुलाया तो पूछा कि कोई गलत काम तो नहीं किया? तब मुझे लगा यह बेहद गंभीर मामला है और यह लांछन हटाने के लिए लड़ना चाहिए। और आज सच की जीत सामने आ गई।
गौरतलब है कि बोफोर्स तोप के गोले ने राजीव गांधी और बच्चन परिवार के रिश्तों को भी अपने जद में ले लिया। उसके बाद से दोनों खटाश पैदा हुई जो आज तक है। मालूम हो कि इस घोटाले में स्वीडन के पूर्व पुलिस चीफ स्टेन लिंडस्ट्रोम ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। लिंडस्ट्रोम ने यह खुलासा किया है कि बोफोर्स तोप सौदे में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का कोई हाथ नहीं था। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने ही इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी आक्टोवियो क्वात्रोकी को बचाया था जबकि उसके खिलाफ तमाम ठोस सबुत थे। लिंडस्ट्रोम ने कहा है कि तमाम सबूत होने के बावजूद भी राजीव गांधी के इशारे पर आक्टोवियो क्वात्रोकी भाग निकला जबकि अमिताभ बच्चन जैसे बेगुनाह शख्स को फंसा दिया गया।












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