कड़े फैसले लेने में ना घबरायें नौकरशाह: मनमोहन

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात को स्वीकार किया कि देश का नौकरशाही तंत्र फैसले लेने से घबरा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को फैसले लेने चाहिए, लेकिन वो फैसले कानून के मुताबिक होने। प्रधानमंत्री ने इस बात को भी स्वीकार किया कि नौकरशाही में भ्रष्टाचार है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अधिकारियों को इस बात की चिंता नहीं होनी चाहिए कि उनसे गलती होगी या फिर उन्हें सजा दी जायेगी। देश को आर्थिक सुधार की पटरी पर ले जाने के लिए ये जरूरी है। मनमोहन के मुताबिक देश में आर्थिक सुधार जारी रहेगा।
श्री सिंह ने कहा कि लोग मानते हैं कि एक दशक पहले नौकरशाही में नैतिकता का ताना-बाना मजबूत था, लेकिन आज नैतिकता कम हुई है। मालूम हो कि कौशिक ने बुधवार को वॉशिंगटन की संस्था 'कार्नेगी एंडाओमेंट फार इंटरनेशनल पीस' के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि अगले संसदीय चुनावों से पहले भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना मुश्किल है। कौशिक ने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार और घोटालों का भी हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि गठबंधन सरकार के होने, भ्रष्टाचार एवं घोटालों ने आर्थिक सुधारों की गति धीमी की है और नौकरशाही फैसला करने में जोखिम नहीं उठा रही है।












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