चुस्त और छोटे कपड़े पहनकर महिलाओं का चर्च में आना कबूल नहीं

पारदर्शी कपड़े भी लड़कियों की शालीनता का मजाक उड़ाते हैं। महिलाओं को वैसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, जिससे उनकी देह झांकती हो। प्रार्थना के वक्त तो ऐसे कपड़ों को बिल्कुल ही नहीं पहनना चाहिए। इस बाबत चर्च के अधिकारी कहते हैं कि बिशप ने कोई फतवा जारी नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ अपील की है। उन्हें उम्मीद है कि इस अपील पर महिलाएं अमल करेंगी।
बिशप के इस बयान पर महानगर में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। ईसाई समुदाय की युवतियों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह स्वतंत्रता का हनन है। उनका धर्म बिशप को इस बात की इजाजत नहीं देता कि वह कोई ड्रेस कोड लागू करें। महानगर के प्रोटेस्टेंट ईसाई भी इस नसीहत को गैरजरूरी मान रहे हैं। साल्टलेक क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल की प्राचार्य सुजाता डिसूजा भी बिशप के मंतव्य से खफा हैं। उन्होंने कहा कि आज के जमाने में हम 100 साल पुराने कपड़े पहनने को बाध्य नहीं कर सकते।












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