पहाड़ी और छोटे हो रहे हैं

उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्रों के निवासियों में औसत कद में कमी दर्ज की गई है। भारतीय मानव सर्वेक्षण की तरफ से चल रहे जनजातीय सर्वेक्षण के दौरान यह औसत कद 156 से लेकर लगभग 164 सेंटीमीटर के बीच पाई गई है। अभी तक हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले लुशाई समेत अन्य जनजातियों में औसत कद 163 सेंटीमीटर से लेकर 170 सेंटीमीटर तक रहा है। 25 से भी अधिक सालों से इस औसत को स्वीकार किया जाता रहा है।
लेकिन हाल ही में सेना भर्ती रैली के दौरान छूट के बावजूद तकरीबन 1600 युवाओं का ख्वाब इसलिए टूट गया, क्योंकि वह निर्धारित 166 सेमी के निशान तक नहीं पहुंच पाए। इससे पहाड़वासियों को और छूट दिए जाने का सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि जनजातीय क्षेत्र के निवासियों के फिजियोलॉजिकल पैरामीटर्स की जांच को अंजाम देने वालीं भारतीय मानव सर्वेक्षण की पोस्ट डॉक्टरल फैलो डा.
प्रियंका सिंह सैंपल बेहद छोटा होने के कारण अभी इस दिशा में और अध्ययन की आवश्यकता पर जोर देती हैं। पूरी तरह निष्कर्ष पर पहुंचने में अभी लगभग पांच साल और लगेंगे। भारतीय मानव सर्वेक्षण के अध्यक्ष विनोद कौल कहते हैं पीपुल आफ इंडिया’ प्रोजेक्ट के तहत जनजातियों पर अध्ययन चल ही रहा है। बहुत-सी नई चीजें सामने आएंगी। पांच साल के इस प्रोजेक्ट को अभी पांच साल और एक्सटेंशन मिला है।












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