23 लोगों को जिंदा जलाने पर 23 दोषी और 23 बरी

आणंद से 10 किलोमीटर दूर बसे ओड गांव में एक मार्च 2002 को अल्पसंख्यक समुदाय के 23 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गयी थी। यह मामला उन नौ मामलों में है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी ने जांच कर चाजर्शीट दायर की। विशेष अदालत ने 22 आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि 23 अन्य को बरी कर दिया है।
इस दंगों के दौरान जान बचाने के लिए ओड के पीरावली भोगल इलाके में अल्पसंख्य समुदाय के के 30-32 लोग एक ही घर में छुप गये थे। पेट्रोल और केरोसिन डालकर दंगाइयों ने उस घर को आग के हवाले कर दिया, जिसके कारण 23 लोग झुलसकर मर गये, और कई लोग झुलसकर बुरी तरह से घायल हो गये।
पहले स्थानीय पुलिस द्वारा जांच की जा रही थी, पुलिस द्वारा कुछ अच्छा परिणाम ने पाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी से इसकी जांच कराई गई।












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