हाईवे पर नहीं लगेगी कतार, प्री पेड कार्ड से पेमेंट

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अब इस टैक्स को हवा में वसूलने की तैयारी कर चुका है। इस आधुनिक व्यवस्था के लिए सरकार अब रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक लागू करने जा रही है। वाहन चालकों को बस इतना करना होगा कि टोल रोड के प्रयोग करने के लिए उन्हें एक प्री-पेड कार्ड बनवाना होगा और टोल के करीब आते ही इस कार्ड से अपने-आप भुगतान हो जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कार्डधारक के लिए बंद टोल बैरियर खुद-ब-खुद खुल जाएंगे। इससे वाहन चालकों को गाड़ी की रफ्तार को धीमे करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
इस बाबत मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय दिल्ली से हिमाचल प्रदेश तक परवाणु रूट पर जल्द ही रेडियो तरंगों पर आधारित तकनीक चालू करने जा रही है। बाद में इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है। केंद्रीय परिवहन मंत्री सीपी जोशी 10 अप्रैल को इस तकनीक का अनावरण करेंगे। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए वाहन चालकों को एक डिजिटल चिप अपनी गाड़ी पर चिपकानी होगी और टोल प्लाजा पर लगा कलेक्शन यंत्र उस चिप के जरिए टोल टैक्स की रकम काट लेगा। हालांकि वाहन चालक को उस चिप में मोबाइल फोन की तर्ज पर प्रीपेड कार्ड के जरिए पैसे भरवाने पड़ेंगे। मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी पर आधारित इस तकनीक को दक्षिण भारत के एक हाईवे पर भी लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।
जानकारों की माने तो मुसाफिरों की परेशानी दूर करने के अलावा इस तकनीक को देश भर के तमाम टोल प्लाजा पर आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में यह प्रणाली पहले से ही है। इससे पहले जोशी ने मंत्रालय का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करते हुए बताया कि सरकार हर दिन 20 किमी सड़क निर्माण के लक्ष्य को 2014 तक प्राप्त कर लेगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार इस वित्त वर्ष (31 मार्च 2013 तक) में 8,800 किमी लंबाई के सड़कों के ठेके जारी कर देगी। वहीं जोशी ने बताया कि सरकार ने इस वर्ष 7,957 किमी लंबाई के सड़कों के ठेके दे दिए हैं। जबकि इस साल का लक्ष्य 7,300 किमी का था। सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकारों को पत्र लिख उनसे 25 ब्लैक स्पॉट (जहां दुर्घटना होने की संभावना अधिक रहती है) पहचानने को कहा है। राज्य सरकारों के जवाब के बाद इंजीनियरों की टीम उस जगह का मुआइना कर दुर्घटना रोकने के उपाय बताएगी। इसके अलावा जोशी ने राज्य सरकारों से ड्राइवरों की ट्रेनिंग पर भी ध्यान देने के लिए लिखा है।












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