आतंक से लड़ाई में अमेरिका से कुछ सीखे भारत

यह तो सिर्फ बानगी है अब जरा हकीकत जान लीजिए। अमेरिका ने सिर्फ हाफिज सईद पर ही नहीं बल्कि ऐसे चार आतंकियों पर ईनाम घोषित किया है जिनका अमेरिकी हमलों में कनेक्शन शायद ही हो। गौरतलब है कि अमेरिका ने हाफिज पर 51 करोड रुपये ईनाम की घोषणा की है। इतना ही नहीं सईद के साले और लश्कर के सहसंस्थापक अब्दुल रहमान मक्की पर भी 15 करोड़ डालर का इनाम रखा गया है। भारत ने हफिज पर अमेरिका की तरफ से किये गये ईनाम की घोषणा का स्वागत कर अपनी जिम्मदारी से पल्ला झाड़ लिया है। तो आईए हाफिज सईद पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
कौन है हाफिज सईद?
एक रूढि़वादी पंजाबी परिवार में जन्मा 61 वर्षीय हाफिज सईद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और जमात उद दावा का प्रमुख है। हाफिज का जन्म पंजाब प्रांत सरगोधा में 6 मई 1950 को हुआ था। भारत पाक विभाजन के समय शिमला से लाहौर जाते वक्त हाफिज अपने परिवार से अलग हो गया।
मुंबई में हुए 26/11 हमले में हाफिज का नाम मास्टर माइंड के रूप में आया और लाहौर कोर्ट ने इस बात को स्वीकार भी किया कि वह मुंबई धमाकों में शामिल था। सईद को मुंबई हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए छह महीने से कम समय तक नजरबंद रखा गया था। मालूम हो कि मुंबई बम धमाकों में 166 लोगों की मौत हो गई थी और सैकडों लोगा जख्मी हो गये थे।
एक करोड़ डालर के इनामी चार आतंकवादियों में शुमार सईद
हफीज मोहम्मद सईद उन चार आतंकवादियों में से एक है जिन पर अमेरिका ने एक करोड़ डालर के इनाम की घोषणा की है। इन चार आतंवादियों की सूची में अफगान तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर शामिल है। इन चार आतंकवादियों से ज्यादा इनाम की राशि सिर्फ अलकायदा प्रमुख अयमन अल-जवाहिरी पर ही है। अमेरिका ने न्याय के लिए इनाम कार्यक्रम के तहत जवाहिरी पर 2.5 करोड़ डालर की इनामी राशि घोषित की है।
चार आतंकवादियों की सूची में 61 वर्षीय सईद के अलावा इराक में अलकायदा के नेता अबु दुआ, मुल्ला उमर और ईरान में अलकायदा का सहयोगी यासिन अलसूरी उर्फ एजेदिन अब्दल अजीज खलील शामिल है जिन पर एक करोड़ डालर की इनामी राशि घोषित की गयी है। रिर्वाडस फॉर जस्टिस वेबसाइट के अनुसार सईद को अरबी और इंजीनियरिंग का पूर्व प्राध्यापक तथा जमात उद दावा का संस्थापक सदस्य बताया गया है।
मालूम हो कि अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा को 2001 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। अप्रैल 2008 में जमात उद दावा को भी यही दर्जा दिया गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुंबई आतंकी हमलों के तुरंत बाद दिसंबर 2008 में जमात उत दावा को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। लाहौर हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसे 2009 में रिहा कर दिया गया था। परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में लश्कर को प्रतिबंधित कर दिया गया था लेकिन पाकिस्तान सरकार ने जमात उत दावा पर औपचारिक रूप से प्रतिबंध नहीं लगाया है।
भारत भी कर सकता था हाफिज पर इनाम की घोषणा
भारत में 166 लोगों की खून से अपने हाथ लाल करने वाले खूंखार आतंकवादी हाफिज सईद पर भारत भी इनाम की घोषणा कर सकता था। मगर ऐसा ना कर भारत ने खुद को बैकफुट पर धकेल दिया है। इस बात का इल्म देश को हो या ना हो मगर अमेरिका के इस कदम का स्वागत कर भारत ने अपनी कमियों को छूपाने की पूरी कोशिश की है। भारत ने कहा है कि इससे लश्कर-ए-तैयबा और इसके सदस्यों तथा संरक्षकों को भी कड़ा संकेत जाता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट है।
मालूम हो कि मुंबई हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सईद को सौंप देने के लिए कहा था। मगर भारत की बात का पाकिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ा। अब ऐसे में जब अमेरिका ने इनाम घोषित किया तो देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान हरकत में आता है या नहीं। मगर ईनाम घोषणा करने के बाद यह बात सामने तो आ ही गई है कि भारत आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर कितना गंभीर है।












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