बिल पास कराते वक्त सपा की नाक में दम कर सकती है बसपा

यूपी में सौ सदस्यों वाली विधान परिषद में बसपा के 63 सदस्य हैं जबकि सपा के केवल 13 सदस्य है ऐसी स्थिति में सरकार को परिषद से विधेयकों को पारित कराना टेढ़ी खीर होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बजट आदि पारित कराने में कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन मायावती सरकार के दौरान जिन अधिनियमों में परिवर्तन किये गये हैं उनमें फिर से बदलाव कर पाना नामुमकिन होगा।
दूसरी ओर सपा के लोग इसे कोई बाधा नहीं मानते क्योंकि उनका दावा है कि किसी विधेयक के विधानसभा से दो बार पारित हो जाने के बाद विधान परिषद उसे रोक नहीं सकती। वित्तीय विधेयकों को उच्च सदन यथावत पारित कर देता है। वर्ष 2007 में सत्ता में आने पर बसपा के साथ भी यही स्थिति थी। विधानसभा में उसका बहुमत था लेकिन विधान परिषद में सपा से उसके बहुत कम सदस्य थे। विधानपरिषद के सभापति गणेश शंकर पाण्डेय भी बसपा के हैं।
वैसे अप्रैल के दूसरे सप्ताह से शुरु होने वाले विधानमंडल सत्र के दौरान सपा को इससे कुछ मुश्किलें हो सकती हैं। विधानपरिषद में बसपा के 63, सपा के 13, भाजपा के 9, कांग्रेस के 3, शिक्षक दल के 7, निर्दलीय 4 और एक सीट रिक्त है। बसपा की माधुरी वर्मा के विधानसभा के लिये चुने जाने के कारण एक सीट रिक्त है जबकि बसपा अध्यक्ष मायावती के राज्यसभा में जाने की वजह से उनकी भी सीट रिक्त होना तय है।












Click it and Unblock the Notifications