वीआईपी के आगे बौने हैं देश के अन्य लोग

गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2010 में 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 16,788 रसूखदारों की सुरक्षा में 50,059 पुलिसकर्मी तैनात थे। छह महीने से ज्यादा की अवधि के लिए जिन बड़े लोगों को सुरक्षा मुहैया करायी गयी थी उनमें कई मंत्री, सांसद, विधायक, न्यायाधीश और नौकरशाह शमिल थे। दिलचस्प तो यह है कि साल 2010 में इन वीआईपी की सुरक्षा के लिए महज 28,298 पुलिसकर्मियों की तैनाती को मंजूरी मिली थी। बीते शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि सुरक्षित लोगों की हिफाजत का अमला अमूमन उपलब्ध संसाधनों से हासिल किया जाता है। ऐसा इस मकसद के लिए मंजूरी क्षमता में इजाफे के बगैर ही होता है ।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित लोगों की हिफाजत की ड्यूटी में तैनाती में हुए इजाफे ने पहले से ही मानव संसाधन की कमी से जूझ रहे राज्य पुलिस बलों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं । इसलिए वीआईपी सुरक्षा में पुलिस की तैनाती की नियमित समीक्षा की जरूरत है । इसमें जरूरत आधारित आकलन के साथ-साथ इस बात की भी जरूरत है कि वीआईपी सुरक्षा के लिए इसी अनुपात में सुरक्षाकर्मियों की मंजूर की जाने वाली संख्या में इजाफा हो और ये पेशेवर तौर पर प्रशिक्षित हों।
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट की ओर से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, एक जनवरी 2011 तक प्रति एक लाख आबादी पर पुलिसकर्मियों की मंजूर संख्या 173.51 थी जबकि असल में औसतन 131.39 पुलिसकर्मी ही प्रति एक लाख की जनसंख्या की सुरक्षा के लिए तैनात थे। साल 2009 में कुल मिलाकर 47,355 सुरक्षाकर्मी देश भर के 17,451 वीआईपी की हिफाजत के लिए तैनात थे जबकि मंजूरी इनसे लगभग आधे की ही दी गयी थी। साल 2009 में वीआईपी सुरक्षा के लिए 23,637 जवानों को तैनात किया गया था।












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