आजादी के बाद पहली बार सरकार पहुंची अबूझमाड़

आजादी के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के जंगल में स्थित माओवादियों की मांद अबूझमाड़ में घुसने में सीआरपीएफ के शेरों (जवानों) को सफलता मिली है। अबूझमाड़ को माओवादियों का मुख्यालय माना जाता है। इस जंगली इलाके तक आज तक सरकार की पहुंच नहीं बन पाई थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने अपने तरह के पहले नक्सल विरोधी अभियान में इस मुश्किल काम को संभव कर दिखाया। अबूझमाड़ फतह के इस अभियान में सीआरपीएफ और उसकी कोबरा इकाई, विभिन्न अर्द्धसैनिक बल और राज्य पुलिस के करीब 3000 जवान शामिल थे। जवानों ने 4000 वर्ग किमी. में फैले इस जंगल में तलाशी अभियान शुरू किया और माओवादियों के मुख्यालय तक पहुंचने में सफल रहे। नक्सलियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बलों ने यह अभियान 5 मार्च को शुरू किया था, जो 20 मार्च को समाप्त हुआ। इस दौरान 33 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया।
इस अभियान का कोड नाम ‘माद’,‘किलाम’ और ‘पोडकू’ रखा गया था। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सीआरपीएफ के महानिदेशक के. विजय कुमार और छत्तीसगढ़ में आईजी (ऑपरेशन) पंकज सिंह को सौंपी गई थी। इन दोनों अधिकारियों ने विस्तृत योजना तैयार की और इसके बाद जंगल में स्थिति नक्सलियों के गढ़ को ढहाने का अभियान शुरू किया गया। ब्रिटिश काल में किए गए इस जंगल के सर्वे के आधार पर सीआरपीएफ के अधिकारियों ने जंगल में तीन ओर नारायणपुर-गढ़चिरौली (माद), भाईरामगढ़-मतवारा (पोडकू) और मारदापाल-छोटेडोंगर (किलाम) से घुसने की योजना बनाई। विजय कुमार ने बताया कि स्थायी रूप से बनाए गए मुख्यालय से सुरक्षा बलों के मूवमेंट की 24 घंटे निगरानी की गई। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान 33 नक्सली गिरफ्तार किए गए। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों के लिए यह जंगल बिल्कुल ही नया था, जबकि नक्सली इसके चप्पे-चप्पे से परिचित थे। इसके बावजूद जवानों ने एक बड़ी सफलता हासिल की।












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