अदालत की अवमानना में आईएफसीआई के सीईओ को सजा

न्यायमूर्ति पीके भसीन ने इस मामले में फैसला देते हुए कहा कि वर्तमान में एक खतरनाक प्रवृति बढ़ रही है कि अदालत के आदेश की अनदेखी की जाए और यदि कार्रवाई का समय आए तो अधीनस्थों पर गाज गिरा दो। यह एक दुष्ट प्रवृति है जिस पर कार्रवाई जरूरी है। इससे अधीनस्थों का हौसला बढ़ेगा और वे दंड से मुक्ति पाएंगे। आईएफसीआई के उक्त वरिष्ठ अधिकारी 200 करोड़ रुपये की रिकवरी के मामले में वर्ष 2009 से ही अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। जब जवाब मांगा गया तो उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताया।
उक्त दोनों अधिकारियों के अलावा रिकवरी अधिकारी आरके बंसल किसी भी सहानुभूति के हकदार नहीं है। इसके बाद अदालत ने तीनों को कैद की सजा सुना दी। अदालत ने जुर्माने की राशि में से दो लाख रुपये दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विस में जमा करवाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आईएफसीआई सार्वजनिक क्षेत्र का संगठन है और वह अपने प्रमुख व वरिष्ठ अधिकारी की लापरवाही से नुकसान क्यों उठाए। अत: जुर्माने की राशि आईएफसीआई के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक अतुल कुमार राय, सहायक महाप्रबंधक शालिनी सोनी से वसूली जाए। अदालत ने आदेश दिया कि चार सप्ताह में अतुल कुमार से साढ़े तीन लाख और शालिनी से डेढ़ लाख रुपये वसूले जाएं।












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