रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का दांव पड़ा उल्टा

ममता के तेवर देखकर दिनेश त्रिवेदी को लग गया था कि अब तृणमूल का केंद्र की सरकार से विदाई तय है। ममता ज्यादा दिन केंद्र की सरकार में नहीं रहेंगी। लेकिन कुर्सी का चस्का ऐसा लगा था कि दिनेश त्रिवेदी किसी भी हाल में रेल मंत्री का पद छोड़ना नहीं चाहते थे। इसके लिए वह हर समझौता करने को तैयार थे। वह कांग्रेस में जा कर मंत्री पद बचाना चाहते थे। मनमोहन इसके लिए तैयार थे। लेकिन सोनिया के तेवर देखकर मामला पलट गया। सोनिया ने साफ कर दिया कि कांग्रेस ममता को साथ ले कर चलेगी। ममता को दरकिनार कर दिनेश त्रिवेदी को कांग्रेस में शामिल नहीं किया जाएगा, न ही ममता की मर्जी बगैर उन्हें मंत्री रखा जाएगा।
कल शाम कोलकाता से ममता का फरमान आया तो दिनेश त्रिवेदी आश्वस्त थे कि कांग्रेस उन्हें बचा लेगी। वो कांग्रेस में चले जाएंगे और मंत्री का पद बच जाएगा। मनमोहन तैयार थे, लेकिन ममता ने सोनिया से संपर्क साधा कि मनमोहन मेरे फरमान पर खामोश हो गए हैं। सोनिया ने तुरंत मनमोहन को निर्देश दिया कि आप दिनेश त्रिवेदी से इस्तीफे के लिए कहें । बुझे मन से मनमोहन ने दिनेश त्रिवेदी को इस्तीफे के लिए कहना पड़ा। इसतरह दिनेश का सफर खत्म हो गया।
ममता के फरमान को जब सोनिया ने ओके कर दिया तो ममता ने मुकुल राय को रेल मंत्री बनने के लिए दिल्ली जाने को निर्देश दिया। तब तक कोई भी घटना सामने नहीं आई थी। मुकुल राय के कोलकाता से रवानगी की खबर से कोलकाता की राजनीति गरमा गई । राजनीतिक गलियारे में लोग अनुमान लगाने लगे कि कही मुकुल मंत्री बनने तो दिल्ली तो नहीं जा रहे हैं।
मुकुल राय ने एक बांग्ला चैनल को गलती से बता दिया कि वो कल यानी गुरुवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। इससे शाम को कोलकाता में अफवाह फैल गई। देर रात साफ हो गया कि मुकुल मंत्री बनने ही दिल्ली गए हैं।कल दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि रेल बजट का फैसला राइटर्स बिल्डिंग से नहीं होता, लेकिन ममता ने दिखा दिया कि राइटर्स बिल्डिंग से ही रेल बजट तय होता है। कम से कम जब तक ममता की पार्टी केद्र में शामिल है।












Click it and Unblock the Notifications