समाजवादी पार्टी ने तोड़ा छोटे दलों का सपना

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव से उ मीद लगाये बैठे छोटे दलों को आखिरकार निराशा ही हाथ लगी। समाजवादी पार्टी के स्पष्ट बहुमत मिलने से निर्दलीय और छोटे दलों का लाल बत्ती मिलने का उनका सपना टूट गया है। चुनाव परिणाम आने से पहले कयास लगाये जा रहे थे कि इस बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा और विधानसभा त्रिशंकु आयेगी। इन अटकलों से निर्दलीय और छोटे दल काफी खुश थे क्योंकि सरकार में उनकी भागीदारी होती और वे बगैर लाल बत्ती लिये किसी दल को समर्थन नहीं देते।

निर्दलीय विधायकों में यदि किसी को लालबत्ती मिली तो उसमें केवल कुन्डा के विधायक रघुराज प्रताप ङ्क्षसह उर्फ राजा भैया शामिल होंगे। यूं तो राजा भैया निर्दलीय उ मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हैं लेकिन उन्हें सपा समर्थक ही माना जाता है। त्रिशंकु सरकार बनने की अटकलों को मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है और विधानसभा की कुल 403 सीटों मे से सपा को 224 सीटों में जीत दिलाते हुए स्पष्ट बहुमत की सरकार बनवा दी है। इससे सबसे बड़ा झटका राष्ट्रीय लोकदल को लगा।

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने अपने सांसद पुत्र जयंत चौधरी को त्रिशंकु विधानसभा आने की स भावना के तहत ही विधानसभा का चुनाव लड़वाया था। जयंत चौधरी मथुरा से सांसद हैं और मथुरा जिले की माट सीट से विधायक चुने गये हैं। चुनाव प्रचार के दौरान कुछ सभाओं में जयंत चौधरी के समर्थकों ने उन्हें मु यमंत्री के रूप में भी प्रोजेक्ट कर दिया था लेकिन पूर्ण बहुमत की सरकार बन जाने पर उनकी आकांक्षा धरी की धरी रह गयी। कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लडऩे वाले राष्ट्रीय लोकदल रालोद को नौ सीटे मिली हैं।

कमोवेश यही हालात पीस पार्टी, कौमी एकता दल और अपना दल और निर्दलीय विधायकों की रही। पीस पार्टी के चार विधायक जीतने में सफल रहे जबकि कौमी एकता दल और अपना दल के एक-एक और छह निर्दलीय चुनाव जीते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते थे कि विधानसभा त्रिशंकु आयेगी और छोटे दल तथा निर्दलीय विधायक सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका में रहेंगे। इन स भावनाओं को नकारते हुए मतदाताओं ने सपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का मौका दे दिया, इससे कांग्रेस, रालोद, पीस पार्टी, कौमी एकता दल, अपना दल और निर्दलीयों उ मीदवारों को खासतौर पर निराशा हुई।

पीस पार्टी के अध्यक्ष डा. अयूब ने चुनाव से पहले दावा किया था कि उनकी मदद के बगैर किसी की सरकार नहीं बनेगी। वहीं चुनाव परिणाम आने से पहले विशेषज्ञों का मानना था कि सपा को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और रालोद का समर्थन लेना पड़ेगा। इसी बीच कांग्रेस महासचिव दिग्विजय ङ्क्षसह और केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने किसी दल को बहुमत नहीं मिलने पर राष्ट्रपति शासन लगाने का बयान दे दिया था। मतदाताओं ने सभी के बयानों और दावो को दरकिनार करते हुए सपा को ऐतिहासिक जीत दिलायी जिससे छोटे दल और निर्दलीय विधायकों की लाल बत्ती पाने की लालसा धरी रह गयी।

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