बजट के पहले केंद्र सरकार ने चलायी महंगाई की रेल

Goods Train
दिल्ली (ब्यूरो)। बजट में किराया बढ़ाने या माल भाड़ा ने पर हंगामा मचता है, सबकी नजर जाती है। इन सबसे बचने के लिए रेलवे ने यह सब काम पहले ही कर दिया है। यानी महंगाई की रेल केंद्र सरकार ने पहले ही चला दी है। फिर रेल बजट में कोई भाड़ा नहीं बढ़ाया जाएगा तो आसानी से गर्व से कहा जा सकता है कि रेल भाड़ा नही बढ़ा।

रेलवे ने खाद और अनाजों की ढुलाई दरों पर लागू चार फीसदी की छूट खत्म कर दी है। इसके अलावा रेल बजट से पहले ही कई अन्य वस्तुओं के माल भाड़े में भी 10-15 फीसदी का इजाफा किया गया है। 2010 में रेलवे ने चीनी और पेट्रोलियम उत्पादों समेत कई प्रमुख वस्तुओं के माल भाड़े में चार फीसदी का इजाफा किया था। ईंधन की कीमतें बढ़ने के बाद यह बढ़ोतरी की गई थी। लेकिन अनाज और उर्वरकों की ढुलाई को तब इस बढ़ोतरी के दायरे से बाहर रख गया था। रेलवे की अधिसूचना के मुताबिक माल भाड़े को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया के तहत यह छूट खत्म की गई है। रेलवे ने दावा किया है कि भाड़े में इस बढ़ोतरी का असर आम आदमी पर नहीं पड़ेगा क्योंकि एफसीआई जैसी सरकारी एजेंसियां इस वृद्धि को खुद झेल लेंगी।

इस बीच रेलवे ने निर्यात के लिए भेजे जाने वाले लौह अयस्क की ढुलाई दरों में 16 फीसदी की कमी कर दी है। लौह अयस्क के लिए नई दरें 475 रुपये प्रति टन कम कर अब 2425 रुपये प्रति टन कर दी गई हैं। रेलवे के मुताबिक यह नई दरें 5 मार्च से लागू हो गई हैं। मालूम हो कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क निर्यातक देश है। रेलवे को माल ढुलाई से होने वाली कुल आय में लौह अयस्क की ढुलाई की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। मालूम हो कि इस वित्त वर्ष में लौह अयस्क ढुलाई में कमी आई है क्योंकि कर्नाटक और उड़ीसा में अवैध खनन पर रोक लगा दी गई है।

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